5 करोड़ का सोना, नंगे पांव संकल्प… माघ मेले में छाए गूगल गोल्डन बाबा

सोने-चांदी की आभा, नंगे पांव संकल्प और शिविर में भक्ति… माघ मेले में छाए गूगल गोल्डन बाबा

प्रयागराज। संगम की रेती पर चल रहे माघ मेले में इस बार साधु-संतों की भीड़ के बीच एक ऐसा नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है, जिसे देखने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है—गूगल गोल्डन बाबा। सिर से पांव तक सोने-चांदी से सजे बाबा न सिर्फ अपने भव्य स्वरूप, बल्कि अपने अनोखे संकल्पों के कारण भी हर किसी का ध्यान खींच रहे हैं।
करीब 5 करोड़ रुपये मूल्य के सोने-चांदी के आभूषण धारण किए गूगल गोल्डन बाबा जब संगम तट पर दिखाई देते हैं, तो लोग हैरानी और आस्था—दोनों से उन्हें निहारते रह जाते हैं। साधारण वेशधारी संतों के बीच बाबा का यह दिव्य और भव्य स्वरूप माघ मेले की सबसे अलग तस्वीर पेश कर रहा है।
कौन हैं गूगल गोल्डन बाबा?
गूगल गोल्डन बाबा का असली नाम मनोज आनंद महाराज है और वे कानपुर (उत्तर प्रदेश) के निवासी हैं। बीते करीब 20 वर्षों से वे सोने-चांदी के आभूषण धारण कर रहे हैं। बाबा के हाथों में भारी सोने के कंगन, उंगलियों में देवी-देवताओं की आकृतियों वाली अंगूठियां, गले में शंख और रुद्राक्ष की मालाएं—हर वस्तु में सोने-चांदी की झलक साफ दिखाई देती है।
चांदी के बर्तन, सोने का लड्डू गोपाल
बाबा सिर्फ पहनावे में ही नहीं, बल्कि अपनी दिनचर्या में भी अलग हैं। वे चांदी के बर्तन में भोजन करते हैं और चांदी के पात्र में ही पानी पीते हैं। उनके पास पूरी तरह सोने से बनी लड्डू गोपाल की मूर्ति है, जिसे वे हमेशा अपने साथ रखते हैं। बाबा का कहना है कि यही लड्डू गोपाल उनके सबसे बड़े रक्षक हैं।
नंगे पांव चलने का अनोखा संकल्प
गूगल गोल्डन बाबा पहले लगभग 5 लाख रुपये की चांदी की चप्पल पहनते थे, लेकिन अब उन्होंने उन्हें त्याग दिया है। इसके पीछे एक खास संकल्प है। बाबा का कहना है कि जब तक योगी आदित्यनाथ देश के प्रधानमंत्री नहीं बन जाते, तब तक वे नंगे पांव ही चलेंगे। यह संकल्प उनके शिविर और मेले में चर्चा का विषय बना हुआ है।
मुख्यमंत्री की तस्वीर वाला मुकुट
बाबा के सिर पर सजा चांदी का मुकुट, जिस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तस्वीर लगी है, लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। श्रद्धालु इस मुकुट को देखकर रुक जाते हैं और बाबा से उनके संकल्प के बारे में जानने को उत्सुक रहते हैं।
परंपरा और आस्था का प्रतीक
सोना पहनने को लेकर बाबा कहते हैं कि वे क्षत्रिय परंपरा से जुड़े हैं और उनके पूर्वज भी सोना धारण करते थे। उनके अनुसार सोना उनके लिए दिखावा नहीं, बल्कि शौर्य, शक्ति और आस्था का प्रतीक है।
सोशल मीडिया से संगम तक छाए बाबा
माघ मेले में बाबा के शिविर में प्रतिदिन पूजा-पाठ, दान-पुण्य और धार्मिक अनुष्ठान होते हैं। वहीं श्रद्धालु उनके साथ फोटो और सेल्फी लेने के लिए उत्साहित नजर आते हैं। गूगल गोल्डन बाबा न सिर्फ संगम की रेती पर, बल्कि सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहे हैं।
आस्था, संकल्प और भव्यता का यह अनोखा संगम—प्रयागराज माघ मेले की पहचान बनता जा रहा है।

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