बिनु सत्संग विवेक न होई। हे राम ।
राम कृपा बिन सुलभ न सोई।हे राम ।
पवनसुत हनुमान की जय
राधे श्री कृष्ण भगवान की जय
बागेश्वर धाम कीजय
विदिशा वालों की और मेरी ओर से महाराज जी के चरणों में पहले प्रणाम
आत्मा के मोक्ष और जगत के हित के लिए जो काम करे वही संत और गाते हुये कहा शिवराज ने
” बिनु सत्संग विवेक न होई। हे राम ।
राम कृपा बिन सुलभ न सोई।हे राम ।
आगे उन्होंने कहा हम पर भी कृपा है प्रभु की वआपकी की।
आज की विदिशा धरती पर आपका हार्दिक अभिनंदन करता हूं।
क्योंकि विदिशा हमारी कर्मभूमि है अतः हम सभी से आशा करते हैं कि सभी वंदन कीजिए आज देख रहे हैं कि विदिशा में भक्ति की धारा बह रही है जैसा कि कहा गया है कि 
जीवन का अंतिम लक्ष्य है परमात्मा की प्राप्ति।
और भगवान कैसे मिलेगा तो आप जैसे संतों ने कहा
पहला मार्ग है ज्ञान मार्ग
जो आप जैसे संत ज्ञान की गंगा बहा रहे हैं और वह भगवान ही होते हैं।
क्योंकि महाराज जी जनता तो पूरी ज्ञानमार्गी हो नहीं सकती इनको भगवान से मिलना है तो क्या करना पड़ेगा?उसके लिए
दूसरा मार्ग है भक्ति मार्ग
यानी भगवान की भक्ति में जो पागल हो जाए कोई भगवान को पिता मानता है और तो कोई मीरा की तरह पति मान लेते हैं जैसा कि कहा गया है मेरा तो गिरधर गोपाल ।
जैसी पवनसुत हनुमान बजरंगबली एक बार सीताराम का दरबार लगा जिसमें सभी अंगद नील जामवंत सभी बैठे अचानक सीता बोली मुझे वैसे तो सभी पुत्र पसंद है लेकिन हनुमान जी का कोई जवाब नहीं और उन्होंने बजरंगबली को मोतियों की माला जोकि अयोध्या की सबसे कीमती माला थी और वह माला खुशी से हनुमान जी के गोद में डाल दी
तभी हनुमान जी ने माला को इधर उधर देखा और मोती तोड़ा पर एक-एक मोती को निकालकर तोड़ के हनुमान जी ने सारे मोती फेंक दिए और सभी देखकर बड़े आश्चर्यचकित हुए और तभी सीता जी बोली बेटा यह माला क्यों तोड़ तोड़ कर फेंक रहे हो तभी हनुमान जी सीता मैया से कहते हैं भैया आप तो झूठ बोलती हैं सीता ने बोला मैंने क्या झूठ बोला आप ही ने तो बोला कि यह माला अयोध्या की सबसे कीमती माला है
अरे मैया मेरे लिए तो कीमती वह है जिसमें प्रभु श्री राम निवास करते हो जिसमें सीता निवास करती हो।
मेरे को माला तोड़ने पर ना तो श्रीराम दिखते हैं ना सीता मैया दिखाई दे रही हैं
तभी एक दरबार से आगे बढकर किसी ने कह दिया कि आपको सब जगह प्रभु श्री राम जहां होंगे वही जगह आप प्रेम करते हो ।
क्या आपके शरीर में भी प्रभु श्रीराम हैं तो और उन्होंने और उसने कहा कि आपके शरीर में प्रभु राम और श्री राम कहां है
तभी बजरंगबली ने अपना सीना भरे दरबार में चीर दिया और सभी दरबार में लोगों ने देखा कि उनके सीने में भगवान श्री राम और भैया सीता विराजमान है ।
यह भक्ति मार्ग जो भक्ति पर चलते हैं वह यह मार्ग प्राप्त करते हैं।
और तीसरा मार्ग है कर्म मार्ग
भगवान ने जिसको जो कर्म निश्चित कर दिया वह कार्य ईमानदारी से करते रहो ।
मास्टर है तो अच्छे से पढ़ाओ
डॉक्टर हैं तो अच्छे से इलाज करो
कर्मचारी है तो रिश्वत ना लो
नेता हो तो बेईमानी मत करो
तो भगवान मिल जाएंगे सीधे-सीधे भगवान मिल जाएंगे यह कर्म मार्ग ही है।





