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सर्व प्रथम उन शहीदों क्रांतिकारियों व माता बहिन बेटियों वीरांगनाओं को कोटि-कोटि नमन जिन्होंने भारत राष्ट्र की स्वतंत्रता में अपनी जान व जीवन को खतरे में डालकर राष्ट्र मुक्ति की बलि वेदी पर अपने प्राणों की आहूतियां दी हैं। उन क्रांतिकारी वीरों वीरांगनाओं के श्री चरणों में हम सभी भारतवासी श्रद्धा सुमन अर्पित करते हैं एवं राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा राष्ट्र के प्रत्येक घर में फहराना हमारी एकता अखंडता का पूर्ण परमसत्य परिचायक होगा । स्वतंत्रता का अर्थ मात्र स्वतंत्र होना नहीं है बल्कि राष्ट्र के मानव समाज को (नर-नारियों को ) पारस्परिक प्रेम सौहार्द्र पूर्ण अनेकता में एकता बनाए रखनें व एक सूत्र में पिरोए रखने का पूर्ण परम सत्य अभिप्राय है I देश के प्रत्येक नागरिक का पूर्ण परम सत्य समर्पण राष्ट्र के प्रति पारस्परिक होना चाहिए । देश में क्या गरीब क्या अमीर एक दूसरे के सुख दुःख में तकलीफ आनंद में शामिल होते रहना चाहिए तभी भारत का मानव समुदाय स्वतंत्रता की सत्यानुभूति करेगा । इस तरह से ही भारत राष्ट्र के सभी समुदाय देश को उन्नति परक , सत्य विकासपरक मार्ग की ओर ले जाने में सफल व सिद्ध होंगे और वर्तमान में सत्ता आसीन राजनेताओं का सबका साथ सबका विकास नारा सत्य मायने में सिद्ध हो सकता है। हम सभी भारत वासियों का कर्तव्य है राष्ट्र को विकासोन्मुखी बनाने में पारस्परिक सम्पूर्ण मतभेद भुलाकर पूर्ण परम सत्य एकता का परिचय देते हुए राष्ट्र को विकास की ओर ले जाने में सम्पूर्ण योगदान करें। सच्ची स्वतंत्रता का यही सत्य तात्पर्य है ।

-डा० बनवारी लाल पीपर “शास्त्री “

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