वाह रे ! बौद्धिक विकास । वाह री ! उच्च शिक्षा एम. एससी. , बी. एड. अपने सौहार्द्यमयी ग्रहस्थ जीवन में अनौचित्य पूर्ण अपेक्षायें करके, अपेक्षाओं…
Author: Banwari Lal Shastri
दलित वर्ग के सामने सबसे बड़ा प्रश्न – वह किस-किस से संघर्ष करे? रिपोॅट: – डॉ. बनवारी लाल पीपर “शास्त्री” भारतीय संविधान सभी नागरिकों को समानता,…
परमेश्वरीय, परमात्मीय सर्वोच्च सर्वोपरि, निराकार, साकार छवि रूप, रंग स्वरूप मात्र प्रकृति स्वरूपा और उससे प्रत्यक्ष होने का व शाश्वत प्रेम स्नेह , दया , कृपा…
समाज में नैतिक पतन, झूठ-फरेब और अपराध पर बढ़ती चिंता, सत्याचार अपनाने की अपील रिपोॅट: डा० बनवारी लाल पीपर “शास्त्री” नई दिल्ली। देश में बढ़ते छल,…
1 . वाह री राजनीति, हाय री राजनीति – राजनीति बहुत खराब है। यह छल छद्म, झूठ , पाखण्ड, अन्याय, अत्याचार, धोखा दगा, विश्वासघात, हत्या व…
अनियमित , असीमित कामनाओं की इच्छाओं को पालने से व्यक्ति, मनुष्य (नर-नारी , स्त्री-पुरुष ) नष्ट भ्रष्ट्र होकर नाश को / आत्मविनाश को प्राप्त होते हैं।…
आज राजतंत्र में विद्यमान राजनेता एक स्वमेव स्वयं की व अपने वर्ण की सीमा में तन-मन-जीवन सत्य न्यायिक स्वरूप जिसे परमेश्वर सर्वेश्वर का सत्य न्याय का…
कोई मूढ़, दुर्बुद्धि व्यक्तिगत मनोभावीय स्वरूप से किसी का भी बुरा चाहने वाला, किसी का भी बुरा करने की, बुरा कराने की मंशा ( इच्छा )…
आज हमारे देश में नैतिकता की गिरावट व अनैतिकता को बढ़ावा देश के पूर्व एवं भावी कर्णधारों से ले कर जनमानस तक ने दिया है। जिसका…
यह अलग बात है ? कि राष्ट्र राजसत्ता तंत्र ही यदि भ्रष्ट्र आचार में आकण्ठ डूबा हो और उपरोक्त सत्य सूत्र लागू ही न करे ?…



