Author: Banwari Lal Shastri

भारत में चाहे जितने दिखावा जनित अच्छे से अच्छे लुभावने वाले कानून बना लिये जाये ? जब तक सत्ताधीश, न्यायधीश , शासन अधिकारी , शासन कर्मचारी…

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अपने ही जब कर्तव्य भूल जाएं तो गैरों से शिकायत कैसी—डा. बनवारी लाल पीपर ‘शास्त्री’ ने गीत के माध्यम से कही जीवन की गहरी बात रिपोर्ट…

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1. उस हर व्यक्ति के लिए सदैव जबतक तन में प्राण हैं। सदैव उसके प्रति कृतज्ञ रहो। जो तुम्हारे सत्य सुख शांति आनंद का व आत्म…

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जिन क्रांति वीरों ने, माताओं, बहनों,बेटियों ने मात्र सत्य जीवन का सत्य, परम सत्ता प्रकृतेश्वरी धरती माता सत्य उसपर रहने विचरने, खाने पीने, आहार भोजन की…

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वाह रे ! बौद्धिक विकास । वाह री ! उच्च शिक्षा एम. एससी. , बी. एड. अपने सौहार्द्यमयी ग्रहस्थ जीवन में अनौचित्य पूर्ण अपेक्षायें करके, अपेक्षाओं…

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दलित वर्ग के सामने सबसे बड़ा प्रश्न – वह किस-किस से संघर्ष करे? रिपोॅट: – डॉ. बनवारी लाल पीपर “शास्त्री” भारतीय संविधान सभी नागरिकों को समानता,…

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परमेश्वरीय, परमात्मीय सर्वोच्च सर्वोपरि, निराकार, साकार छवि रूप, रंग स्वरूप मात्र प्रकृति स्वरूपा और उससे प्रत्यक्ष होने का व शाश्वत प्रेम स्नेह , दया , कृपा…

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समाज में नैतिक पतन, झूठ-फरेब और अपराध पर बढ़ती चिंता, सत्याचार अपनाने की अपील रिपोॅट: डा० बनवारी लाल पीपर “शास्त्री” नई दिल्ली। देश में बढ़ते छल,…

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1 . वाह री राजनीति, हाय री राजनीति – राजनीति बहुत खराब है। यह छल छद्म, झूठ , पाखण्ड, अन्याय, अत्याचार, धोखा दगा, विश्वासघात, हत्या व…

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अनियमित , असीमित कामनाओं की इच्छाओं को पालने से व्यक्ति, मनुष्य (नर-नारी , स्त्री-पुरुष ) नष्ट भ्रष्ट्र होकर नाश को / आत्मविनाश को प्राप्त होते हैं।…

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