Author: Banwari Lal Shastri

अनियमित , असीमित कामनाओं की इच्छाओं को पालने से व्यक्ति, मनुष्य (नर-नारी , स्त्री-पुरुष ) नष्ट भ्रष्ट्र होकर नाश को / आत्मविनाश को प्राप्त होते हैं।…

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आज राजतंत्र में विद्यमान राजनेता एक स्वमेव स्वयं की व अपने वर्ण की सीमा में तन-मन-जीवन सत्य न्यायिक स्वरूप जिसे परमेश्वर सर्वेश्वर का सत्य न्याय का…

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आज हमारे देश में नैतिकता की गिरावट व अनैतिकता को बढ़ावा देश के पूर्व एवं भावी कर्णधारों से ले कर जनमानस तक ने दिया है। जिसका…

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यह अलग बात है ? कि राष्ट्र राजसत्ता तंत्र ही यदि भ्रष्ट्र आचार में आकण्ठ डूबा हो और उपरोक्त सत्य सूत्र लागू ही न करे ?…

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धार्मिक मतभेद समाप्त कर पारस्परिक प्रेम बढ़ाने का अनूठा सुझाव: डॉ. बनवारीलाल पीपर ‘शास्त्री’ देश में विभिन्न समुदायों और सम्प्रदायों के बीच बढ़ते धार्मिक मतभेदों को…

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“सत्य कर्तव्य पालन ही ईश्वर की सच्ची आराधना” — डॉ. बनवारी लाल पीपर ‘शास्त्री’ https://youtu.be/d0Gd4g28jQA?si=X0MqVph1bRaGCnfX झांसी। प्रख्यात चिंतक एवं विद्वान डॉ. बनवारी लाल पीपर ‘शास्त्री’ ने…

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महामानवों के नाम पर आडंबर और राजनीति: क्या भारत ने अपने सत्यवादियों से कुछ सीखा? रिपोर्ट: – डा० बनवारीलाल पीपर “शास्त्री” भारतवर्ष की भूमि त्याग, तपस्या…

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