उरई जजी मे सरकार द्वारा एडवोकेट एक्ट में संशोधन को लेकर वकीलों ने विरोध प्रदर्शन किया
रिपोँट : महेश चौधरी
आपको बता दे एडवोकेट अधिनियम 1961 में सरकार द्वारा बिल 2025 को तैयार कर लिया गया जिसमें वकीलों की स्वतंत्रता सरकार के पास होगी एक्ट में बार काउंसिल में तीन सदस्य केंद्र सरकार द्वारा नामित होंगे अर्थात इस संशोधन के बाद बार काउंसिल में सरकार का सीधे-सीधे दखल हो जाएगा
वही कोई अधिवक्ता हड़ताल नहीं कर सकेगा ना हीं कार्य से व्रत रहेगा ना ही किसी न्यायालय का बहिष्कार करेगा यदि वह ऐसा करता है तो उसे राज्य की एडवोकेट रोल लिस्ट से हटा दिया जाएगा फैसला करने के लिए एक कमेटी बनाई जाएगी कमेटी का अध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट अथवा हाई कोर्ट का पूर्व जज या उनके द्वारा नामित व्यक्ति होगा वहीं यदि किसी अधिवक्ता को किसी अपराध में 3 साल या उससे ज्यादा सजा हो जाती है तब उसे राज्य की एडवोकेट रोल लिस्ट से हटा दिया जाएगा
अब केंद्र सरकार विदेशी फॉर्म को भारत में वकालत का कार्य करने के लिए नियम बना सकेगी केंद्र सरकार किसी प्रावधान नियम लागू करने के लिए बार काउंसिल को निर्देश दे सकेगी यह ही नहीं इसके अलावा और भी ऐसे प्रावधान है जो अधिवक्ताओं के हित को सीधे-सीधे प्रभावित कर सकते हैं , यह जानकारी स्थानीय बार काउंसिल के अधिवक्ताओं ने दी






