होली और ईद: भाईचारे का संदेश, गंगा-जमुनी तहज़ीब की मिसाल
रिपोँट : अख्तर अली
देवरिया आज जुम्मे की नमाज अदा करने के बाद मस्जिद के बाहर एक अनोखा और प्रेरणादायक संदेश देखने को मिला। नमाजियों ने सिर्फ अपने और अपने समुदाय के लिए नहीं, बल्कि पूरे देश की सलामती और भाईचारे के लिए दुआ की।
लोगों ने गंगा-जमुनी तहज़ीब को बनाए रखने का संकल्प लेते हुए आपसी प्रेम और सौहार्द को बनाए रखने का आह्वान किया। नमाज के बाद एक अहम संदेश दिया गया कि कोई भी व्यक्ति अगर किसी पर रंग डाल दे या फेंक दे, तो इसे गलत न समझा जाए, बल्कि उसे आशीर्वाद दिया जाए और साथ में मिलकर होली खेली जाए।
त्योहारों में प्रेम और एकता का संदेश
संदेश में खास तौर पर इस बात पर जोर दिया गया कि चाहे होली हो या ईद, सभी को मिलकर इन्हें मनाना चाहिए। समाज में नफरत फैलाने की किसी भी कोशिश को नकारते हुए लोगों से शांति बनाए रखने और खुशियों को बांटने की अपील की गई।
एक स्थानीय व्यक्ति ने कहा, “हमारा भारत विविधताओं में एकता की मिसाल है। त्योहार हमें जोड़ते हैं, तोड़ते नहीं। अगर हम सभी धर्मों के पर्वों को मिलकर मनाएं, तो आपसी प्रेम और भाईचारा और मजबूत होगा।”
सांप्रदायिक सौहार्द का प्रतीक बना यह संदेश
यह पहल भारत की साझा संस्कृति को दर्शाती है, जहां हर धर्म, हर त्योहार को समान रूप से महत्व दिया जाता है। आयोजकों ने सभी समुदायों से अपील की कि किसी भी प्रकार के तनाव या गलतफहमी से बचते हुए प्रेम और सद्भाव को बनाए रखें।
त्योहार खुशियों का समय होता है, और अगर हम इन्हें मिलकर मनाएं, तो यह न केवल हमारी संस्कृति को मजबूत करेगा बल्कि देश में अमन-चैन का भी संदेश देगा।





