117 करोड़ के मुआवजा घोटाले में बड़ा शिकंजा: IAS अफसर ही नहीं, अब पत्नी-बच्चों की संपत्ति भी रडार पर
लखनऊ/नोएडा। नोएडा अथॉरिटी के 117 करोड़ रुपये से अधिक के मुआवजा घोटाले में अब जांच ने नया मोड़ ले लिया है। अब तक सिर्फ फाइलों और मुआवजे तक सिमटी जांच को एसआईटी ने सीधे अफसरों की जेब और संपत्तियों तक पहुंचा दिया है। खास बात यह है कि अब आईएएस अफसरों के साथ-साथ उनकी पत्नी, बेटे-बेटियां और करीबी रिश्तेदार भी जांच के दायरे में आ गए हैं।
अब सवाल सिर्फ घोटाले का नहीं, आय से ज्यादा संपत्ति का
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर गठित विशेष जांच दल (SIT) ने साफ कर दिया है कि अब मामला केवल गलत मुआवजा बांटने का नहीं, बल्कि आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का है। एसआईटी की कमान पुलिस महानिदेशक (कारागार प्रशासन) के नेतृत्व में है और जांच तेजी से आगे बढ़ रही है।
2015 से 2017 तक की हर संपत्ति का हिसाब
एसआईटी के एसपी संजीव कुमार बाजपेई ने 2 जनवरी को प्रदेश के सभी विकास प्राधिकरणों और जिलाधिकारियों को पत्र भेजकर निर्देश दिया है कि
1 जनवरी 2015 से 31 दिसंबर 2017 के बीच खरीदी गई
आवासीय व व्यावसायिक संपत्तियां
प्लॉट, फ्लैट, दुकान
रजिस्ट्री, एग्रीमेंट और अन्य दस्तावेज
का पूरा विवरण तत्काल उपलब्ध कराया जाए।
एलडीए में मचा हड़कंप, पुरानी फाइलें खंगाली जा रहीं
जांच का दायरा बढ़ते ही लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) में हड़कंप मच गया है। वजह साफ है—घोटाले में नामजद कुछ अफसर पहले एलडीए में भी तैनात रह चुके हैं।
पूर्व में नोएडा अथॉरिटी में तैनात रहे आईएएस अटल कुमार राय भी जांच के घेरे में हैं। एसआईटी ने उनकी पत्नी, पुत्र और पुत्री के नाम दर्ज संपत्तियों का पूरा ब्योरा मांगा है।
पूर्व सीईओ रमा रमन पर भी शिकंजा
नोएडा अथॉरिटी के पूर्व सीईओ रमा रमन के खिलाफ भी आय से अधिक संपत्ति की जांच औपचारिक रूप से शुरू हो चुकी है। उनकी ही नहीं, बल्कि पत्नी, पुत्र और पुत्री के नाम दर्ज हर संपत्ति की पड़ताल की जा रही है।
अफसरों की लंबी फेहरिस्त, पूरा परिवार रडार पर
एसआईटी ने तत्कालीन विधि अधिकारी राजेश कुमार, उनकी पत्नी आशा रानी, पुत्री कृतिका राय, पुत्र देवेश राय सहित कई वरिष्ठ अफसरों और उनके परिवारजनों की संपत्तियों की जानकारी तलब की है।
इसके अलावा वीरेंद्र सिंह नागर, विनोद कुमार पवार, दिनेश कुमार सिंह, एस.एन. श्रीवास्तव, मदनलाल मीणा, आलोक कुमार टंडन, राजेश प्रकाश, महेंद्र कुमार भंडारी समेत अनेक अधिकारियों और उनके परिजनों की संपत्तियां भी खंगाली जा रही हैं।
सिर्फ प्राधिकरण नहीं, गृह जनपद भी जांच के दायरे में
एसआईटी ने स्पष्ट किया है कि जांच सिर्फ विकास प्राधिकरणों तक सीमित नहीं रहेगी।
इन अफसरों के गृह जनपदों से भी संपत्तियों का पूरा रिकॉर्ड मंगाया जा रहा है। सभी दस्तावेज प्राथमिकता के आधार पर एसआईटी की ई-मेल आईडी पर भेजने के निर्देश दिए गए हैं, क्योंकि मामला सीधे सुप्रीम कोर्ट से जुड़ा है।
सेवा में हों या सेवानिवृत्त—कोई नहीं बचेगा
13 अगस्त 2025 को सुप्रीम कोर्ट के आदेश से गठित एसआईटी अब घोटाले से जुड़े कथित अवैध धन और संपत्तियों की परतें खोलने में जुटी है।
कुछ आरोपी अफसर रिटायर हो चुके हैं, एक का निधन हो चुका है, जबकि कुछ अब भी अहम पदों पर बने हुए हैं—लेकिन जांच सबके लिए एक समान है।
साफ संकेत है—अब मुआवजा घोटाले की जांच फाइलों से निकलकर आलीशान मकानों और बैंक बैलेंस तक पहुंच चुकी है।





