UGC के नए नियमों पर मचा घमासान, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान बोले— किसी के साथ नहीं होगा भेदभाव
■ कानून का दुरुपयोग किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा’
नई दिल्ली।
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा लागू किए गए नए एंटी डिस्क्रिमिनेशन नियमों को लेकर देशभर के शैक्षणिक संस्थानों में बहस तेज हो गई है। दिल्ली सहित कई विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में छात्र संगठनों द्वारा विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं। इसी बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस विवाद पर पहली बार खुलकर सरकार का पक्ष रखा है।
UGC ने 13 जनवरी 2026 को Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulation 2026 लागू किया है। इन नियमों को लेकर विरोध कर रहे छात्रों और शिक्षाविदों का कहना है कि समानता समिति (Equity Committee) में सामान्य वर्ग के लिए कोई अनिवार्य प्रतिनिधित्व तय नहीं किया गया है, जिससे ‘रिवर्स डिस्क्रिमिनेशन’ यानी उल्टे भेदभाव की आशंका पैदा हो रही है।
इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने साफ शब्दों में कहा कि सरकार का उद्देश्य किसी भी वर्ग के साथ अन्याय करना नहीं है। समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में उन्होंने कहा,
“मैं बहुत विनम्रता के साथ देशवासियों को आश्वस्त करना चाहता हूं कि किसी के साथ उत्पीड़न नहीं होने दिया जाएगा। भेदभाव के नाम पर कानून का दुरुपयोग किसी को करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।”
धर्मेंद्र प्रधान ने आगे कहा कि चाहे UGC हो, केंद्र सरकार हो या राज्य सरकारें— सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है कि नियमों का पालन निष्पक्षता और संवैधानिक मर्यादा के तहत किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि नए नियम पूरी तरह से भारतीय संविधान की भावना और दायरे में रहकर बनाए गए हैं।
शिक्षा मंत्री के इस बयान के बाद यह संकेत माना जा रहा है कि सरकार छात्रों और शिक्षाविदों की चिंताओं को गंभीरता से ले रही है और आवश्यकता पड़ने पर संवाद के रास्ते भी खुले रखे जाएंगे। हालांकि, विरोध कर रहे संगठनों का कहना है कि वे तब तक आंदोलन जारी रखेंगे, जब तक सभी वर्गों के लिए स्पष्ट और संतुलित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित नहीं किया जाता।
UGC के नए नियमों को लेकर यह विवाद आने वाले दिनों में और गहराने की संभावना है, जिस पर सरकार और आयोग की अगली रणनीति पर सबकी नजर बनी हुई है।





