2047 के विकसित भारत की राह में टेक्निकल टेक्सटाइल पर सरकार का जोर, भीलवाड़ा के लिए खुल सकते हैं नए अवसर
भीलवाड़ा।

साल 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य को लेकर केंद्र सरकार अब टेक्सटाइल सेक्टर में बड़े बदलाव की दिशा में आगे बढ़ रही है। परंपरागत कपड़ा उद्योग से आगे निकलते हुए सरकार का फोकस अब टेक्निकल टेक्सटाइल पर है, ताकि चीन और यूरोपीय देशों को वैश्विक बाजार में कड़ी टक्कर दी जा सके।
एशिया के मैनचेस्टर के नाम से पहचानी जाने वाली कपड़ा नगरी भीलवाड़ा परंपरागत टेक्सटाइल में देश में अग्रणी रही है। शूटिंग-शर्टिंग जैसे कपड़ों के उत्पादन में भीलवाड़ा हर साल लगभग 125 करोड़ मीटर कपड़ा बनाकर शीर्ष स्थान पर है। इसके बावजूद टेक्निकल टेक्सटाइल के क्षेत्र में भीलवाड़ा की भागीदारी फिलहाल शून्य बनी हुई है।
भीलवाड़ा की 18 स्पिनिंग मिलों के माध्यम से करीब 45 प्रतिशत यार्न का निर्यात किया जा रहा है, लेकिन आधुनिक टेक्निकल टेक्सटाइल को समय रहते नहीं अपनाने के कारण यह सेक्टर चीन और यूरोपीय देशों की तुलना में पिछड़ता नजर आ रहा है।
इन चुनौतियों को देखते हुए अब केंद्र सरकार उद्योगपतियों के साथ मिलकर मंथन कर रही है। राइजिंग राजस्थान के बाद अब सरकार ने टेक्निकल टेक्सटाइल को बढ़ावा देने की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं। देशभर में टेक्निकल टेक्सटाइल से जुड़े 50 से अधिक विशेषज्ञों और उद्यमियों को एक मंच पर लाकर रणनीति तैयार की जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भीलवाड़ा की कपड़ा इंडस्ट्री टेक्निकल टेक्सटाइल के साथ कदमताल करती है, तो आने वाले पांच वर्षों में शहर का सालाना कारोबार 25 हजार करोड़ से बढ़कर 35 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।
टेक्निकल टेक्सटाइल के क्षेत्र में स्टार्टअप के जरिए काम कर रहे उद्योगपति दयाल मेहता का कहना है कि इस बार के केंद्रीय बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने टेक्निकल टेक्सटाइल पर विशेष फोकस किया है।
उन्होंने बताया कि बजट में 12 अहम बिंदुओं के जरिए इस सेक्टर को मजबूती देने की योजना बनाई गई है। सरकार ने नेशनल फाइबर मिशन शुरू किया है, प्राकृतिक फाइबर के लिए इंपोर्ट ड्यूटी को खत्म किया गया है और करीब 1500 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है।
हालांकि, औद्योगिक नगरी भीलवाड़ा के सामने सबसे बड़ी समस्या महंगी बिजली बनी हुई है। मेवाड़ चैंबर ऑफ कॉमर्स के सचिव आर. के. जैन के अनुसार, राजस्थान में कपड़ा उद्योगों को दूसरे राज्यों की तुलना में लगभग 2 रुपये प्रति यूनिट महंगी बिजली मिल रही है। इसके चलते जो इंडस्ट्री दूसरे राज्यों में शिफ्ट हो चुकी हैं, वे राजस्थान की तुलना में 5 से 7 रुपये प्रति मीटर सस्ता कपड़ा बाजार में बेच पा रही हैं।
बिजली की बढ़ती लागत से परेशान उद्योगपतियों ने अब सोलर एनर्जी का विकल्प अपनाना शुरू कर दिया है। जानकारी के अनुसार, भीलवाड़ा में अब तक 300 से अधिक उद्योगों में रूफटॉप सोलर पैनल लगाए जा चुके हैं, जिससे लागत कम करने की कोशिश की जा रही है।
कुल मिलाकर, टेक्निकल टेक्सटाइल को अपनाकर भीलवाड़ा न केवल अपनी पारंपरिक पहचान को नई ऊंचाई दे सकता है, बल्कि विकसित भारत के सपने में भी अहम भूमिका निभा सकता है।

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