यूपी में हजारों भवन स्वामियों को बड़ी राहत, जिला पंचायत से पास नक्शे होंगे वैध

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में वर्षों से अवैध निर्माण के संकट से जूझ रहे हजारों भवन स्वामियों के लिए राहत भरी खबर है। प्रदेश सरकार ने फैसला किया है कि जिला पंचायत की ओर से विकास प्राधिकरणों की सीमा में पास किए गए नक्शों को वैध माना जाएगा। इस संबंध में आवास विभाग द्वारा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समक्ष विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया गया, जिसे मुख्यमंत्री ने स्वीकृति प्रदान कर दी है।
इस निर्णय के बाद उन भवन स्वामियों को बड़ी राहत मिलेगी, जिनके नक्शे वैध रूप से पास होने के बावजूद उन्हें अवैध निर्माण का नोटिस झेलना पड़ रहा था।
एलडीए और केडीए क्षेत्रों में बड़ी संख्या में नियम विरुद्ध नक्शे
जांच में सामने आया कि लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) की सीमा में वर्ष 2010 से 2025 के बीच जिला पंचायत द्वारा कुल 1,555 नक्शे स्वीकृत किए गए। इनमें से मात्र 418 नक्शे ही एलडीए के भू-उपयोग नियमों के अनुरूप पाए गए, जबकि 1,134 भवनों के नक्शे मास्टर प्लान के विपरीत थे।
इसी प्रकार कानपुर विकास प्राधिकरण (केडीए) क्षेत्र में 2016 से 2024 के बीच 550 नक्शे पास किए गए, जिनमें से केवल 58 नक्शे ही केडीए के मास्टर प्लान के अनुरूप थे। शेष 442 नक्शे भू-उपयोग नियमों का उल्लंघन करते पाए गए।
पार्क और हरित क्षेत्र भी नहीं बचे
जांच में यह भी सामने आया कि नक्शा पास करते समय जिला पंचायत ने न तो मास्टर प्लान का ध्यान रखा और न ही भू-उपयोग नियमों का। परिणामस्वरूप पार्क, खुले स्थल और हरित क्षेत्रों में भी निर्माण की अनुमति दे दी गई। कानपुर में तो एक ही नक्शा 8.5 हेक्टेयर (करीब 85 हजार वर्ग मीटर) क्षेत्रफल में स्वीकृत कर दिया गया, जिसे गंभीर अनियमितता माना गया है।
सुरक्षा और अनापत्ति प्रमाण पत्रों की भी अनदेखी
रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ कि जिला पंचायत ने नक्शे स्वीकृत करते समय तहसील, अग्निशमन विभाग, वन विभाग और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण से अनापत्ति प्रमाण पत्र नहीं लिए। इसके अलावा भूकंपरोधी संरचना के लिए आईआईटी से स्ट्रक्चरल सेफ्टी सर्टिफिकेट भी नहीं लिया गया। कई आवासीय योजनाओं में बिजली सब स्टेशन, जलापूर्ति और अन्य आवश्यक सुविधाओं के लिए निर्धारित स्थान तक नहीं छोड़े गए।
वन टाइम सेटलमेंट स्कीम से मिलेगा समाधान
राज्य सरकार ने इस समस्या के समाधान के लिए वन टाइम सेटलमेंट स्कीम लागू करने का निर्णय लिया है। इसके तहत जो निर्माण विकास प्राधिकरण या जिला पंचायत की नियमावली के अनुसार शमन योग्य हैं, उन्हें निशुल्क पंजीकरण के जरिए वैध किया जाएगा।
जहां मास्टर प्लान के विपरीत लेकिन जोनिंग नियमों के अनुरूप निर्माण हुआ है, उन्हें भी बिना शुल्क वैध किया जाएगा। वहीं, जहां भू-उपयोग परिवर्तन के विपरीत निर्माण हुआ है, वहां निर्धारित शुल्क लेकर नियमितीकरण किया जाएगा। खास बात यह है कि सीमित अवधि तक शुल्क में 75 प्रतिशत की छूट दी जाएगी और भवन स्वामी को केवल 25 प्रतिशत शुल्क देना होगा।
12 महीने की मोहलत, फिर सख्ती
सरकार द्वारा एक कट-ऑफ तिथि तय की जाएगी और भवन स्वामियों को करीब 12 महीने का समय दिया जाएगा। इसके बाद किसी भी अवैध निर्माण को नियमित नहीं किया जाएगा। तय समय सीमा के बाद प्राधिकरण सीलिंग और ध्वस्तीकरण जैसी सख्त कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र होंगे।
इन निर्माणों को नहीं मिलेगी राहत
शासन ने स्पष्ट किया है कि जलाशयों, मास्टर प्लान की प्रमुख सड़कों, शासकीय भूमि, हरित क्षेत्र, पार्क और खुले स्थलों पर बने निर्माणों का नियमितीकरण नहीं किया जाएगा। हालांकि, यदि ग्रीन या पार्क क्षेत्र में बने भवन के बदले समतुल्य भूमि आरक्षित की जाती है, तो उस पर विचार किया जा सकता है।
एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने बताया कि जिला पंचायत द्वारा पास किए गए नक्शों को नियमित करने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। मुख्यमंत्री की मंजूरी के बाद यह योजना जल्द लागू होगी, जिससे प्रदेश भर के हजारों लोगों को अवैध निर्माण के भय से मुक्ति मिलेगी और वे बिना किसी शोषण के अपने घरों में सुरक्षित रह सकेंगे।

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