1962 युद्ध के वीर नायक जसवंत सिंह रावत का पैतृक घर बनेगा संग्रहालय, 17 नवंबर को होगा भूमि पूजन
पौड़ी गढ़वाल। 1962 के भारत-चीन युद्ध के अमर वीर नायक राइफलमैन जसवंत सिंह रावत की वीरगाथा को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने के लिए उनके उत्तराखंड स्थित पैतृक घर को संग्रहालय के रूप में विकसित किया जाएगा। पौड़ी गढ़वाल जिले के ब्यार्यूं गांव स्थित उनके पुश्तैनी आवास को आधुनिक सुविधाओं से युक्त स्मारक के रूप में विकसित करने की योजना है।
भाजपा सांसद अनिल बलूनी के अनुसार, संग्रहालय निर्माण के लिए 17 नवंबर को भूमि पूजन किया जाएगा। उन्होंने हाल ही में ब्यार्यूं गांव पहुंचकर जसवंत सिंह रावत को श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके परिवार के सदस्यों से मुलाकात की। परिवार की ओर से भी संग्रहालय निर्माण के प्रस्ताव पर सहमति जताई गई है।
नूरानांग की लड़ाई में दिखाया अदम्य साहस
राइफलमैन जसवंत सिंह रावत 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान 4 गढ़वाल राइफल्स में तैनात थे। नूरानांग क्षेत्र में उन्होंने बेहद कठिन परिस्थितियों में मोर्चा संभाला और दुश्मन का मुकाबला किया। भारतीय सैन्य इतिहास में उनके साहस और बलिदान की विशेष रूप से चर्चा होती है।
17 नवंबर 1962 को मातृभूमि की रक्षा करते हुए उन्होंने सर्वोच्च बलिदान दिया। उनके अदम्य साहस के लिए उन्हें मरणोपरांत महावीर चक्र से सम्मानित किया गया।
जसवंतगढ़ में आज भी याद किया जाता है बलिदान
तवांग के पास स्थित जसवंतगढ़ युद्ध स्मारक उनके बलिदान की स्मृति से जुड़ा महत्वपूर्ण स्थल है। प्रस्तावित संग्रहालय में उनके जीवन, सैन्य सेवा, नूरानांग युद्ध और वीरता से जुड़े दस्तावेज, तस्वीरें और ऐतिहासिक सामग्री प्रदर्शित किए जाने की योजना है।
सांसद अनिल बलूनी ने कहा कि ब्यार्यूं गांव को वीर सैनिक की स्मृतियों से जुड़े महत्वपूर्ण स्मारक के रूप में विकसित किया जाएगा। इसका उद्देश्य देश-दुनिया से आने वाले लोगों और विशेष रूप से युवा पीढ़ी को जसवंत सिंह रावत के जीवन, सैन्य सेवा और देश के लिए दिए गए बलिदान से परिचित कराना है।
राइफलमैन जसवंत सिंह रावत की वीरगाथा आज भी भारतीय सेना और देश के युवाओं के लिए साहस, कर्तव्य और राष्ट्रसेवा की प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है।






