मेरठ के सरधना थाने में लगी आग ने मचाया भीषण तांडव
■ मेस में रखे सिलिंडर एक के बाद एक फटते रहे
■थाने में लगी आग की घटना में करीब 39 साल का रिकॉर्ड जल गया।
■आग की चपेट में आने से कंप्यूटर से लेकर हार्ड डिस्क भी जलकर राख हो गई।
मेरठ के सरधना थाने में आग लगने के वक्त थाने का ज्यादातर स्टाफ क्षेत्र मे गश्त पर था। उस वक्त 10-12 पुलिसकर्मी ही थाने पर मौजूद थे। और आठ बजे की शिफ्ट की तैयारी कर रहे थे। लगभग सात बजे अचानक लगी आग ने कुछ ही देर में विकराल रूप धारण कर लिया। मेस में रखे सिलिंडर एक के बाद एक फटते रहे और आग पूरे परिसर मे फैलती चली गई।
बाहर खड़े दोपहिया वाहनों में तेज धमाके शुरू हुए तो पुलिसकर्मी भी दहशत में आ गए।
घमाकों की आवाज से आसपास के लोग भी दहल उठे।
दो घंटे तक लगी आग ने लोगों की सांसे अटका दीं।
- पुलिस वाले आग बैरक और
- एसओ कार्यालय के अंदर तक न पहुंचे
इसके लिए अपने-अपने तरीके से जुगाड़ करते रहे।
थाने में तैनात सिपाही सुमित राजौरा पर कंप्यूटर के रिकॉर्ड की जिम्म्मेदारी थी।
लेकिन आग की चपेट में आने से कंप्यूटर से लेकर हार्ड डिस्क भी जलकर राख हो गई। सुमित ने सीपीयू को वहां से उठाकर भागने की भी कोशिश की, जिससे हार्ड डिस्क बच सके। लेकिन सफल नहीं हो सका व खुद झुलस गया।
जिस समय आग लगी उस वक्त सिपाही केशव खत्री की ड्यूटी पहरे पर थी। जैसे ही उसने मेस में रखे सिलिंडर के पाइप में आग लगी दिखाई दी, तभी वह आग को बुझाने के लिए दौड़ा। इस बीच तेज धमाके के साथ सिलिंडर फट गया। जिसकी चपेट में वह भी आ गया। इससे वहां पर भगदड़ मच गई। किसी तरह दूसरे पुलिसकर्मियों ने उसे वहां से उठाया और आनन-फानन में सभी को अस्पताल में भर्ती कराया
थाने में लगी आग की घटना में करीब 39 साल का रिकॉर्ड जल गया। थाने में सबसे पुराना रिकॉर्ड 1984 का था, जिसके सभी दस्तावेज मालखाने में रखे हुए थे।
आग की चपेट में आने से पूरा मालखाना जलकर राख हो गया। ऐसे में वहां पर रखा पूरा रिकॉर्ड भी जल गया। हालांकि अभी इसकी अधिकारिक पुष्टि नहीं की गई।
थाने में सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज पुराने केसों के होते हैं, जिसमें ज्यादतर मामले कोर्ट में विचाराधीन हैं।
थाने में आग क्यों लगी और इसके पीछे क्या कारण रहा इसकी तह तक जाने के लिए जांच शुरू कर दी गई है।






