“सत्य कर्तव्य पालन ही ईश्वर की सच्ची आराधना” — डॉ. बनवारी लाल पीपर ‘शास्त्री’
झांसी। प्रख्यात चिंतक एवं विद्वान डॉ. बनवारी लाल पीपर ‘शास्त्री’ ने कहा है कि परम सत्ता स्वयं सर्वशक्तिमान, सर्वसमर्थ और पूर्ण है, उसे किसी से किसी प्रकार की सेवा, आशा या अपेक्षा की आवश्यकता नहीं है।
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मनुष्य को परमेश्वर को प्रसन्न करने के लिए बाहरी आडंबरों की नहीं, बल्कि अपने सत्य कर्तव्यों के पारदर्शी और ईमानदार पालन की आवश्यकता है।
डॉ. शास्त्री ने अपने वक्तव्य में कहा कि परम सत्ता प्रकृतेश्वर स्वयं में पूर्ण है — वह जपी, तपी और सर्वशक्तिमान है। ऐसे में मनुष्य यदि केवल पूजा-पाठ और अनुष्ठानों में ही सीमित रह जाए और अपने सामाजिक, पारिवारिक तथा राष्ट्रीय दायित्वों की उपेक्षा करे, तो वह सच्चे अर्थों में ईश्वर की आराधना नहीं कर रहा।
कर्तव्य ही सच्ची पूजा
उन्होंने कहा कि प्रत्येक नर-नारी, स्त्री-पुरुष का प्रथम धर्म है कि वह अपने घर-परिवार — माता-पिता, भाई-बहन, संतानों तथा समाज के प्रति अपने कर्तव्यों का सत्यनिष्ठा से निर्वहन करे। इसके साथ ही राष्ट्र, राष्ट्रसत्ता और विश्व मानवता के प्रति भी आत्मवत भाव से दायित्व निभाना ही सच्ची श्रद्धा है।
डॉ. शास्त्री के अनुसार —
“परमेश्वरीय सत्ता को प्रसन्न करने का रहस्य मंदिरों में दीप जलाने से अधिक अपने कर्मों को सत्य, पारदर्शिता और ईमानदारी से निभाने में है।”
आडंबर नहीं, आचरण आवश्यक
उन्होंने कहा कि आज के समय में धर्म को बाहरी प्रदर्शन तक सीमित कर दिया गया है, जबकि वास्तविक आध्यात्मिकता अपने व्यवहार, नैतिकता और कर्तव्य पालन में निहित है। यदि व्यक्ति अपने कर्मों में सत्य और न्याय का पालन करे, तो वही परम सत्ता के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का सर्वोच्च माध्यम है।
समाज के लिए संदेश
डॉ. बनवारी लाल पीपर ‘शास्त्री’ ने समाज से आह्वान किया कि वह धार्मिक आस्था को कर्मप्रधान दृष्टिकोण से जोड़े। उन्होंने कहा कि जब प्रत्येक व्यक्ति अपने-अपने दायित्वों को आत्मभाव से निभाएगा, तभी समाज, राष्ट्र और विश्व में वास्तविक शांति और संतुलन स्थापित होगा।
निष्कर्ष:
डॉ. शास्त्री का संदेश स्पष्ट है कि परम सत्ता को प्रसन्न करने का मार्ग बाहरी उपासना से अधिक अपने सत्य कर्मों और कर्तव्यपालन में छिपा है। ईमानदारी, पारदर्शिता और उत्तरदायित्व ही सच्ची भक्ति का स्वरूप है।
–डा० बनवारी लाल पीपर “शास्त्री “






