वाह री राजनीति

रिपोर्ट: डा• बनवारी लाल पीपर “शास्त्री”

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  • कुछ लोग पद-प्रतिष्ठा यश मान कीर्ति के लिये तथा धन-धान्य सम्पन्न  होने के लिये राजनीति कर रहे हैं।
  • कुछ लोग जो अनैतिक कमाई जो देश वा राष्ट्र के लोगों की है, उसे राजनीति में आकर उनपर कोई हस्ताक्षेप ना हो उसको बचाने के लिए उससे बचने के लिए राजनीति कर रहे हैं।
    • कुछ लोग मित्र,दोस्त,घर परिवार,नाते रिश्तेदार,जातिय समाज को धन-धान्य से परिपूर्ण करने तथा उन्हें उनकी अपराधिक पृष्ठभूमि से बचाने के लिए पक्षपातीय स्वरूप धारण करके राजनीति कर रहे हैं।
  • कुछ लोग जो युवा अवस्था में शक्ति,सामर्थ्य व अहंकार के वश में होकर हत्या,मर्डर,लूट-डकैती की है, करवाई है। उनसे बचने राजसत्ता के पावर में न्यायधीशो पर ऐनकेन प्रकारेण दबाव, बनाने दबाव रखने हेतु राजनीति कर रहे हैं।

वाह री राजनीति ? ईश्वरीय सत्ता परम सत्ता

सर्वोच्च सत्ता के परम सत्य सात्विकीय गुण सम्पन्न आत्मवत‌् सर्व भूतेषु ” के परम सत्य सर्व हितीय परमसत्य आत्म भाव से ओतप्रोत परम सत्य को १०० % सौ प्रतिशत धारण करके परम सत्य (ईश्वर से प्रेरित होकर कोई ऐसा त्यागीय, तपस्वीय, सत्यवेत्ता, तत्तवेत्ता, तत्ववेत्ता नहीं दिखाई देता। जो निर्विकार, निश्चछल, निस्ष्कामीय, निस्कष्कपट, निर्मोहीय, निर्लोभीय, निरहंकारीय (अहंकार रहित) पंच विकारों (काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार) से रहित युक्त राजनीति कर्ता, सर्वहितीय, सत्य हितीय प्रजा शासक कोई नहीं दिखाई देता।

ज्यादातर लोग कलयुग बताकर सत्य-असत्य मिश्रित राजनीति, कूटनीति, कुटिल नीति, कपट नीति का समावेश करके राजनीति कर रहे हैं। जो सर्व हितीय कभी भी सिद्ध नहीं हो सकती। श्री राम ने राजपाट घर परिवार त्याग कर सुख त्याग कर राजनीति की। श्री कृष्ण ने अक्षुण्य निष्पाप परम सत्य प्रेम त्याग कर सत्य धर्म की रक्षा के लिए राजनीति की। श्री बुद्ध ने वैभव पूर्ण साम्राज्य व भोग तथा ऐश्वर्य को त्याग कर / ठोकर मार कर जीवन-मृत्यु का सत्य क्या है ? का बोध कराया व परम  सत्य तत्तीय ज्ञान प्रकाश दिया। व्यक्ति के जीवनीय व‌ ईश्वरीय सत्य तत्त का मार्ग दिया उन्होंने ऐसी राजनीति का वरण किया और सर्व समक्ष के सामने परम व पूर्ण यथार्थ सत्य सर्वहित के रूप में प्रकट किया। हजरत उमर ने अपना आहार भोजन टोपियां सिल कर बेचकर बादशाहत की/राजनीति की। हजरत अबू बक्र ने जैसा प्रजा का खाना, वैसा स्वयं का खाना खाकर बादशाहत की / राजनीति की एवं प्रजा का दु:ख दर्द को सत्य रूप में अपना दर्द अनुभूत करके मान करके राजनीति की। रानी लक्ष्मीबाई, आजाद, सुभाष, भगत सिंह जी ने प्राणों की आहुति सत्य की बलिवेदी पर चढ़ाकर भेंट की सत्य की राजनीति संचालन की अपेक्षा करते / रखते दी। बाबा साहब भीमराव अंबेडकर व उनकी धर्मपत्नी रमाबाई ने अपने गृहस्थीय स्वरूप में सर्व हित हेतु तमाम अति कठोर रूपी अभावों को झेलते हुये व अपने पुत्रों की, स्वयं की आहुति दी एवं दुखी, पीड़ित, भूखे, नंगे लोगों के ऊपर दिग्भ्रमित धारा में बहने वाले आत्मवत् रूप से न देखने वाले लोगों के द्वारा किये जाने वाले होने वाले अन्याय अत्याचार को मिटाने के लिए राजनीति की। परंतु आज जो राजनीति चल रही है ?वह स्व विनाशी व सर्व विनाशी दिखाई दे रही अथवा प्रतीत हो रही है ।क्योंकि इसमें राजसत्ताधीश राजसीय और तामसीय गुणों का आचार अपने कार्य चरित्र में कार्य दायित्व में प्रजा हेतु जी रहे हैं, प्रतिपादित कर रहे हैं। इसमें राज्य में, राष्ट्र में, विश्व में सत्य शांति सत्य आचार कभी विस्थापित नहीं हो सकेगा सर्वत्र त्राहि-त्राहि की गूंज राज्य, राष्ट्र, विश्व के लोगों में लोगों के द्वारा सुनाती रहेगी वह लोग सुनते रहेंगे। इसका परम सत्य उपाय है, सत्य उपचार है ” आत्मवत् सर्वभूतेषु ” व “वसुधैव कुटुम्बकम् ” सूत्र सिद्धांत को सृष्टि के प्रत्येक व्यक्ति द्वारा आत्मसात करके सत्य आचार के रूप में धारण,मानन, पालन, क्रियान्वयन पूर्ण परम सत्य रूप में किया जाय। क्योंकि परम सत्य रूप में परम सत्ता सर्वोच्च सत्ता जगद्  पिता जगद् माता, जगदीश्व़र सृष्टि पटल में विद्यमान प्रत्येक जीव-प्राणी-मानव से सर्वत्र प्रेम स्वरूप पारस्परिक जीवन संचालन का छल छह्म झूठ, पाखण्ड व अन्याय अत्याचार से रहित परम सत्य रूप की अपेक्षा करता है / रखता है बस यही उस परम सत्य सर्वेश्व़र की परम सत्य पूजा है, साधना है, आराधना है और वह कहीं कोई अन्य भेंट, छप्पन भोग, सोना चांदी हीरा मोती या अन्य कहीं कोई बलि, त्याग तपस्या,जप-तप कहीं कुछ भी नहीं चाहता है।भले ही अति बुद्धिमान लोगों ने चतुर चालाक निज सुख स्वार्थी इंद्रियेच्छाओं की आपूर्ति की गुलामी लादे लोलुपवादी लालची पेटुओं ने यह रीति रिवाज अपने से बना रखा है। हम उसे परमपिता जगत पिता जगत माता को क्या दे सकते हैं जो सर्वदाता हम सब उसके आगे हर आश्रय का हाथ फैलाने वाले भिक्षु , भिखारी वह सर्वभर्ता, सर्वहतकारी। इस विषय पर व्यक्ति स्वयं दिल दिमाग बुद्धि विवेक ज्ञान अनुभव से स्वयं सोच सकता है।

छोड़ दे छल दम्भ को, झूठ पाखण्ड और घमण्ड को, प्राणियों से प्यार कर आत्मा का मूल सत्य ह्रदय से स्वीकार कर, जीवन तेरा सम्हल जाएगा, यथार्थ सत्य ईश्व़र को पा जाएगा उस अखिलेश्व़र का सार यही है, परमेश्व़र से परम सत्य प्रेम निभाने का मात्र मूल आधार यही है। धड़कता हूं सर्व प्राणियों की धड़कनों में मैं ही, समग्र सृष्टि में विद्यमान सारी जीवन चेतनाओं में मैं ही, जगदीश्व़र का प्यार उन्हीं को मिलता है, जिन्हे अपने आत्मवत् स्वरूपों से आत्मवत् प्यार निभाना आता है।               

                                       -डॉ०बनवारीलाल पीपर ‘शास्त्री’

धर्म लोगों की सेवा में तस्वीह या मुसल्लाह में नहीं -शेख शादी

प्रेम के सिवा तू किसी परमात्मा को न मान – हजरत मूसा

सम्पूर्ण मानवता एक परिवार है अल्लाह उन्हीं से प्यार करता है जो उसकी मानवता (कायनात) से प्यार करता है- मुहम्मद साहब

जिस जगत पिता को किसी से सेवा पूजा की आवश्यकता नहीं। मनुष्य उसकी तो सेवा पूजा करता है और उसके प्यारे पुत्र जगत जीव जो नाना प्रकार के अभावों से ग्रस्त हैं उन्हें तरह-तरह की यातनाएं देता है आस्तिकता और ईश्व़र भक्ति की यह कैसी विडम्बना है।           – लियोनार्ड चेशायर

परमेश्व़र की राजनीति समग्र सृष्टि पटल पर विद्यमान जीव प्राणी मानव के प्रति पारस्परिक प्रेम व प्रियता है। जो छल छद्म से रहित झूठ पाखंड से रहित कूटनीति, कपट नीति,  कुटिलनीति से रहित अन्याय अत्याचार से रहित हो तथा‌ जो निष्पाप, निश्छल,निष्कपट, निष्कलंक स्वरूपीय प्रेम मयी हो। समग्र सृष्टि पटल के प्रत्येक व्यक्ति (नर-नारी, स्त्री- पुरुष) की ऐसी भाव विचारधारा बने तब सर्वत्र आनंद ही आनंद प्रत्येक हृदय में दृष्टिगोचर होगा तथा प्रेम की गंगा समग्र सृष्टि पटल पर बहेगी। राज्य में, राष्ट्र में विश्व में ऐसी पूर्ण परमसत्य की राजनीति होना चाहिए। तभी प्रत्येक ह्रदय में पूर्ण परम सत्य शांति विस्थापित होगी और रहेगी।

-डॉ० बनवारीलाल पीपर “शास्त्री”

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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