विभिन्नीय कष्टों के उद्भव का मूल कारण । – डा० बनवारी लाल पीपर “शास्त्री”

रिपोर्ट:डा० बनवारी लाल पीपर “शास्त्री”

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समग्र सृष्टि में विद्यमा प्रत्येक मानव द्वारा व्यक्तिगत अपने मन की इच्छाओं के सही गलत की अपने बुद्धि विवेक द्वारा न पहिचानना व उनके छह्मीय आकर्षणीय स्वरूपों में फंसकर उनकी पूर्ति आपूर्ति में उन्हे हस्तगत करने में लग जाना

,प्रयत्नरत रहना हो जाना ही सम्पूर्ण व्यक्ति के शारीरिक मानसिक रोग दोष बीमारी व तमा विभिन्नीय कष्टों के उद्भव का मूल कारण । – डा० बनवारी लाल पीपर “शास्त्री”

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