
देवरिया भाटपार रानी कस्बे के मदन मोहन मालवीय पीजी कॉलेज के सभागार मे दर्शन विभाग के तत्वाधान मे आयोजित संगोष्ठी मे बतौर मुख्य अतिथि दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय गोरखपुर दर्शन विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर संजय कुमार राम ने कहा कि योग एक विज्ञान है, जीवन पद्धति है। यह जीवन के सभी पक्षों को अपने अंदर समेट हुआ है।यह एक व्यवस्थित नियम को प्रतिपादित करता है। शरीर को अनुशासित ढंग से रखता है। मन को उद्देश्यपूर्ण दिशा में चलने का बोध कराता है। योग एक प्रयोग भी है, क्योंकि यही मनुष्य को प्रकृति के अनुकूल चलने के लिए प्रेरित करता है विचार गति है, भाव उत्पत्ति है और शब्द अभिव्यक्ति है। योग में इन सबका अपना महत्वपूर्ण योगदान है। यह पूरी तरह से शरीर के धर्म का प्रकृति के अनुकूल बोध कराता है। संस्थान की उपाध्यक्ष प्रखर वक्ता डॉ पवन कुमार राय ने कहा कि चित् चंचल होता है, इनका निरोध योग है। योग आत्मा का विषय है जो मानव के विचारों को एकाग्र कर भौतिक से सूक्ष्म, सूक्ष्म से अतिसूक्ष्म तक ले जाकर आत्मीय-बोध कराता है। योग का संबंध अंत:करण और बाह्य दोनों से है। योग मानव को इहलौकिक और पारलौकिक दोनों की यात्रा कराता है।
प्राचार्य प्रोफेसर सतीश चंद्र गौड़ ने कहा कि योग शरीर, मन और इंद्रियों की क्रिया है। एकमात्र योग ही ऐसी क्रिया है जो मन को वश में करने का मार्ग बताती है। योग जन्म से ही प्राप्त है। आसन-योग नहीं है। यह योग की एक बहिमरुखी क्रिया है जो शरीर को स्वस्थ रखती है, परंतु आसन को ही लोगों ने योग समझ लिया है। वैसे तो योग अनेक हैं और इसके सहयोग के बगैर बोधितत्व सत्य की प्राप्ति भी नहीं है। इसीलिए भक्ति के साथ योग है, ज्ञान के साथ भी योग है, क्रिया के साथ भी योग है, संकल्प के साथ भी योग है। दर्शन विभाग के विभाग अध्यक्ष प्रोफेसर मनोज कुमार ने कहा कि मानव शरीर में ही संपूर्ण ब्रह्मांड का वैभव छिपा है। जिसे पहचानना और जानना आवश्यक है। संपूर्ण ब्रह्मांड की चेतना और प्रारूप को पाकर भी मानव सांसारिक वाटिका में भटकता रहता है। डॉ श्रीनिवास मिश्र ने कहा आकाश और घटाकाश का भेद जानते हुए भी मनुष्य ब्रह्मांड और काया का विमोचन नहीं कर पाता। किनारे की खोज में लक्ष्य के भेदन में सामंजस्य स्थापित करता हुआ, वह स्वत: एक दिन अपने आपको जीवन तट पर खड़ा पाता है। समय उसे दूर फेंक देता है, जीवन ढलने लगता है। तब व्यक्ति जन्म के उद्देश्य को लेकर प्रायश्चित करने लगता है, लेकिन तब वक्त समझौता करना छोड़ देता है। नदियों में जब पानी का बहाव रुक गया तब संगम स्थल तक नहीं पहुंचने के लिए पश्चाताप करने के सिवाय है ही क्या? इसलिए मेरा संदेश है कि योग को माध्यम बनाकर आज और अभी से शरीर रूपी प्रयोगशाला का उपयोग कर सदैव संकल्पित स्वरूप को प्राप्त कर ब्रह्ममय जीवन जिए।
डॉ सुशील कुमार पांडेय ने कहा योग का उद्देश्य शारीरिक, मानसिक, नैतिक, आध्यात्मिक व सामाजिक विकास से है। यह जीवन जीने की कला है। डॉ मनीष नाथ त्रिपाठी ने कहा कि योग में एक महत्वपूर्ण बदलाव आया है, इस विधा में शारीरिक मुद्राएं अधिक महत्वपूर्ण हो गई हैं। डॉ एस के पाठक ने योग के विभिन्न पक्षों पर प्रकाश डाला। डॉ धर्मजीत मिश्र ने भारत को योग गुरु बताया। डॉ ज्ञान प्रकाश ने योग को लेकर विश्व में भारत के बढ़ते गौरव पर अपना पक्ष रखा है।
गोष्ठी की सफलता को लेकर संस्थान के प्रबंधक व वरिष्ठ भाजपा नेता राघवेंद्र वीर विक्रम सिंह ने प्राचार्य के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया।
इस दौरान महाविद्यालय के विभिन्न विभागों के प्राध्यापक वर्ग ,शिव प्रसाद , प्रवीण शाही आदि लोग मौजूद रहे।




