एक दूसरे के प्रति आत्मीयता व एक दूसरे के परिवार से परमसत्य प्रेम ही करना रखना
रिपोर्ट: डा० बनवारी लाल पीपर “शास्त्री
जो भार्या (धर्मपत्नी) अपने भर्तार (पति) किसी के पुत्र, सन्तान को उसके जन्मदाताओं से अलग करना , दूर करना, मिलने जुलने जाने से रोकना, सेवा सुश्रूषा से वंचित करना व कराने की पृष्ठभूमि रचती है अथवा उपरोक्त स्वरूपों की उपरोक्त स्वरूपों में भूमिका निभाती है।
उससे ज्यादा समग्र सृष्टि पटल पर परमेश्वर / सर्वोच्च सत्ता के नीति रीति नियम स्वरूप अथवा नैतिक दृष्टि दर्शन से अभागी, दोषी , दोषिनी , पापी ,पापिनी कोई भी इससे बड़ा पाप नहीं हो सकता ।
और यही दृष्टिकोण प्रत्येक व्यक्ति पर , भर्तार पर भी लागू होता है अत: एक दूसरे के प्रति आत्मीयता व एक दूसरे के परिवार से परमसत्य प्रेम ही करना रखना ।
इस पाप दोष से बचने का परम सत्य उपाय है अथवा परम सत्य उपचार है ।
-डा० बनवारी लाल पीपर “शास्त्री”





