63 करोड़ की फर्जी बिलिंग का खुलासा, किंग पैलेस संचालक शहजाद मलिक फरार — हैदराबाद में बनाई नई फर्म, जांच में खुली परतें

जनपद में जीएसटी विभाग की गहन जांच के बाद किंग पैलेस मंडप के संचालक शहजाद मलिक पर 63.75 करोड़ रुपये की भारीभरकम धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। मुकदमा दर्ज होते ही शहजाद चुपचाप शहर से गायब होकर हैदराबाद में शरण लेने की सूचना है। बताया जा रहा है कि वहां उसने एक नई फर्म भी खड़ी कर दी है और पुराने तरीके से फर्जी बिलिंग का खेल जारी है।

परिवार पहले भी GST चोरी में संदेह के घेरे में

मेरठ निवासी शमशाद मलिक के छह बेटों में से एक शहजाद पर पहले भी जीएसटी अनियमितताओं के आरोप लग चुके हैं। उससे पहले उसका छोटा भाई शहबर करीब छह महीने पहले ईडी की कार्रवाई में करोड़ों की जीएसटी चोरी को लेकर उठाया गया था। परिवार का एक चचेरा भाई भी पुणे की जेल में जीएसटी चोरी के मामले में बंद बताया जाता है।

✔ 2018 में बनाई फर्म, 2020 में जांच में खुलासा

शहजाद ने 2018 में एसडी रिसाइक्लिंग नाम की फर्म बनाई थी।
2020 में जब फर्म की पड़ताल की गई तो:

घोषित पते पर कोई कारोबार नहीं मिला,

कोई स्टॉक मौजूद नहीं था,

गतिविधियां संदेहास्पद पाई गईं।

28 मार्च 2024 को विभाग ने फर्म का पंजीकरण रद्द कर दिया। ऑनलाइन जांच में यह भी सामने आया कि फर्म द्वारा कई अन्य व्यापारियों को फर्जी जीएसटी बिल जारी किए जा रहे थे, जिसका कुल मूल्य 63.75 करोड़ रुपये से अधिक निकला।

✔ दो अन्य फर्मों का भी काला खेल

जांच टीम ने दो और फर्मों में फर्जी बिलिंग का खुलासा किया:

साकिब (मेरठ) – डीएस इंडस्ट्रीज के नाम से रजिस्ट्रेशन, 4.71 करोड़ की धोखाधड़ी

सलमान (मेरठ) – एसएफ ट्रेडिंग कंपनी के नाम पर फर्जी बिलिंग, 9.37 करोड़ का घोटाला

तीनों आरोपियों पर अलग-अलग मुकदमे दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी गई है।

✔ मुकदमा दर्ज होते ही गायब हुआ शहजाद

राज्य कर अधिकारी जरमन सिंह की तहरीर पर मामला दर्ज होते ही शहजाद ने अपना ठिकाना बदल लिया और हैदराबाद में नई फर्म बनाकर फिर सक्रिय हो गया। प्रारंभिक जांच में यह आशंका मजबूत हुई है कि नई फर्म भी फर्जी बिलिंग के लिए ही बनाई गई है।

✔ पुलिस ने भेजा नोटिस, जांच तेज

सीओ अभिषेक तिवारी ने बताया कि:

तीनों मामलों की विवेचना जारी है,

आरोपियों को अपना पक्ष रखने के लिए नोटिस भेजे गए हैं,

जल्द ही और तथ्य सामने आने की संभावना है।

इस बड़े जीएसटी घोटाले ने विभाग में खलबली मचा दी है, और माना जा रहा है कि यह नेटवर्क कई राज्यों तक फैला हो सकता है।

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