पहले डीएसपी, फिर एसडीएम और अब आईएएस: जेएनयू से पढ़े बिहार के हेमंत मिश्रा की प्रेरक सफलता कहानी
बिहार के बक्सर जिले के रहने वाले हेमंत मिश्रा ने महज 25 वर्ष की उम्र में वह मुकाम हासिल कर लिया है, जिसका सपना देश के लाखों युवा देखते हैं। संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा 2024 में उन्होंने 13वीं रैंक हासिल कर आईएएस अधिकारी बनने का गौरव प्राप्त किया है। उनकी इस सफलता से न केवल बक्सर, बल्कि पूरे बिहार में खुशी की लहर है।
हेमंत मिश्रा की कहानी सिर्फ आईएएस बनने तक सीमित नहीं है। इससे पहले भी वह दो बड़ी सरकारी सेवाओं में चयनित हो चुके हैं। उन्होंने पहले उत्तर प्रदेश पुलिस सेवा परीक्षा पास कर डीएसपी (डिप्टी एसपी) का पद हासिल किया। इसके बाद उत्तर प्रदेश पीसीएस परीक्षा में सफलता पाकर एसडीएम बने। अब तीसरी बार, देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षा यूपीएससी पास कर उन्होंने आईएएस अधिकारी के रूप में चयन पाकर अपनी प्रतिभा और मेहनत का लोहा मनवाया है।
जेएनयू से शिक्षा, शुरू से रहा प्रशासनिक सेवा का सपना
हेमंत मिश्रा ने अपनी उच्च शिक्षा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से पूरी की है। पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने सिविल सेवा में जाने का लक्ष्य तय कर लिया था। मजबूत शैक्षणिक आधार, अनुशासित दिनचर्या और लगातार मेहनत उनकी सफलता के मुख्य सूत्र रहे। उन्होंने सीमित संसाधनों के बावजूद कठिन परिश्रम और आत्मविश्वास के बल पर यह मुकाम हासिल किया।
तीसरी बार सरकारी सेवा, फिर भी जज्बा कायम
खास बात यह है कि डीएसपी और एसडीएम जैसे प्रतिष्ठित पदों पर रहने के बावजूद हेमंत मिश्रा का आईएएस बनने का सपना कायम रहा। उन्होंने कभी भी अपनी तैयारी नहीं छोड़ी और लगातार प्रयास करते रहे। उनकी यह यात्रा उन युवाओं के लिए मिसाल है, जो असफलताओं या सीमित उपलब्धियों के बाद प्रयास छोड़ देते हैं।
परिवार और जिले में खुशी का माहौल
हेमंत मिश्रा की सफलता की खबर मिलते ही उनके परिवार में जश्न का माहौल है। बक्सर जिले में लोग उन्हें प्रेरणास्रोत के रूप में देख रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि हेमंत की सफलता से जिले के युवाओं को नई दिशा और आत्मविश्वास मिला है।
युवाओं के लिए प्रेरणा
हेमंत मिश्रा की कहानी यह साबित करती है कि सही लक्ष्य, कड़ी मेहनत और निरंतर प्रयास से कोई भी मंजिल दूर नहीं। उनकी उपलब्धि उन लाखों अभ्यर्थियों के लिए प्रेरणा है, जो सिविल सेवा में जाने का सपना देख रहे हैं।
बिहार के इस होनहार बेटे ने कम उम्र में जो उपलब्धि हासिल की है, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरक उदाहरण बन गई है।





