श्रीनाथजी की नगरी नाथद्वारा के छापर में रावण निर्माण करने वाले कारीगरों से Focus News 24×7 की खास बातचीत
■ दशहरे पर बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक बनेगा रावण दहन, पीढ़ियों से जुड़ी कला और कारीगरों की मेहनत को करीब से जाना
नाथद्वारा, राजस्थान। श्रीनाथजी की पावन नगरी नाथद्वारा के छापर पहुंचकर Focus News 24×7 की टीम ने रावण के पुतले तैयार करने वाले कारीगरों से खास मुलाकात की और उनसे विस्तृत बातचीत की। इस दौरान कारीगर भागीरथ जी, धनराज जी, भूरकर अहमद, शंकर, बबलू तंवर और Saddam Hussain से रावण निर्माण की कला, इसकी तैयारियों, मेहनत और दशहरे के महत्व को लेकर बातचीत की गई।
दशहरा भारतीय संस्कृति और परंपरा का एक महत्वपूर्ण पर्व है। इस दिन भगवान श्रीराम द्वारा रावण पर विजय की स्मृति में रावण दहन किया जाता है। इसके पीछे संदेश यही है कि अंततः सत्य की जीत होती है और अहंकार, अन्याय तथा बुराई का अंत निश्चित है। इस परंपरा को जीवंत बनाए रखने में उन कारीगरों की अहम भूमिका होती है, जो अपनी मेहनत, हुनर और अनुभव से रावण के विशाल पुतलों को आकार देते हैं।
मेहनत, हुनर और अनुभव से तैयार होता है रावण का पुतला
छापर में कारीगरों से हुई बातचीत के दौरान रावण निर्माण की कला और उससे जुड़ी मेहनत को समझने का अवसर मिला। रावण का पुतला तैयार करना केवल एक सामान्य काम नहीं, बल्कि इसमें कलात्मक कौशल, सही नाप-जोख, ढांचे की मजबूती और सजावट का विशेष ध्यान रखना पड़ता है। पुतले के अलग-अलग हिस्सों को तैयार करने से लेकर उन्हें जोड़ने और अंतिम रूप देने तक कारीगरों को काफी मेहनत करनी पड़ती है।
भागीरथ जी, धनराज जी, भूरकर अहमद, शंकर, बबलू तंवर और सद्दाम हुसैन जैसे कारीगर इस कार्य में अपनी भूमिका निभाते हैं। इनके हुनर और मेहनत से दशहरे के आयोजन को विशेष पहचान मिलती है। रावण निर्माण से जुड़े ऐसे कारीगर हमारी सांस्कृतिक परंपराओं को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।
रावण दहन के पीछे छिपा है समाज के लिए संदेश
रावण दहन केवल एक धार्मिक आयोजन या उत्सव नहीं है, बल्कि यह समाज को आत्ममंथन करने का संदेश भी देता है। रावण का अहंकार, क्रोध और अन्याय हमें याद दिलाते हैं कि मनुष्य को अपने भीतर की बुराइयों पर भी विजय प्राप्त करनी चाहिए।
आज के समय में भी इस पर्व का महत्व उतना ही है। समाज में फैली बुराइयों, आपसी वैमनस्य, भ्रष्टाचार, अहंकार और अन्याय को समाप्त करने का संकल्प ही दशहरे के संदेश को सार्थक बना सकता है।
कारीगरों की मेहनत को पहचानना भी जरूरी
त्योहारों की रौनक के पीछे अनेक ऐसे लोग होते हैं, जिनकी मेहनत अक्सर लोगों की नजरों से दूर रह जाती है। रावण के पुतले बनाने वाले कारीगर भी उन्हीं में से एक हैं। उनकी कला, समय और परिश्रम से ही दशहरे के आयोजन को भव्यता मिलती है।
Focus News 24×7 की टीम ने छापर पहुंचकर इन कारीगरों से बातचीत के माध्यम से उनके काम को समझने और उनकी मेहनत को सामने लाने का प्रयास किया। यह खास बातचीत उन लोगों के हुनर और योगदान को सामने लाती है, जो हमारी परंपराओं को जीवित रखने में अहम भूमिका निभाते हैं।
Focus News 24×7 की खास ग्राउंड रिपोर्ट — श्रीनाथजी की नगरी नाथद्वारा के छापर से।
रिपोर्ट: Focus News 24×7






