हादसे को दावत देता बेतवा नहर पर निर्माणाधीन पुल
झांसी–मोठ क्षेत्र में प्रशासनिक लापरवाही बनी ग्रामीणों के लिए खतरा
झांसी जनपद की मोठ तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत साकिन–छेवटा मार्ग पर बेतवा नहर पर बनाया जा रहा पुल बीते कई वर्षों से अधूरा पड़ा है। अधूरे पुल की स्थिति अब इतनी खतरनाक हो चुकी है कि यह किसी भी समय बड़ी दुर्घटना को न्योता दे सकता है।
खासकर रात के अंधेरे में यदि कोई वाहन चालक अनजान होकर इस मार्ग से गुजरता है, तो उसके लिए पुल पार करना जानलेवा साबित हो सकता है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, निर्माणाधीन पुल के एक सिरे पर सड़क अचानक खत्म हो जाती है। यदि कोई वाहन पुल पर चढ़ गया तो दूसरी ओर पुल के नीचे गिरना लगभग तय है। हैरानी की बात यह है कि इतने संवेदनशील स्थान पर न तो कोई चेतावनी बोर्ड लगाया गया है और न ही बैरिकेडिंग की गई है, जिससे ठेकेदार और संबंधित विभाग की गंभीर लापरवाही साफ झलकती है।
ग्रामीणों का कहना है कि आज के समय में कई लोग गूगल मैप के सहारे यात्रा करते हैं। यदि कोई बाहरी व्यक्ति या राहगीर मैप के भरोसे इस रास्ते से गुजरता है, तो किसी भी समय अनहोनी हो सकती है। इसके बावजूद जिम्मेदार विभागों की ओर से अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
स्थिति को और चिंताजनक बनाता है बगल में बना बरसों पुराना पुल, जिसकी हालत भी बेहद जर्जर हो चुकी है। इस पुल से भारी वाहनों का निकलना भी खतरे से खाली नहीं है, लेकिन मजबूरी में लोग इसी रास्ते से आवागमन कर रहे हैं।
यह मार्ग मध्य प्रदेश के दबोह, दिबियापुर, अटा, साजोनी, छेवटा सहित कई गांवों को जोड़ता है। रोजाना बड़ी संख्या में ग्रामीण, किसान, छात्र और व्यापारी इसी रास्ते से आवाजाही करते हैं। ऐसे में अधूरा पुल और जर्जर पुराना पुल क्षेत्रवासियों की जान पर भारी पड़ सकता है।
ग्रामीणों और क्षेत्रवासियों ने प्रशासन से शीघ्र पुल निर्माण कार्य पूरा कराने, अधूरे पुल पर तत्काल बैरिकेडिंग व चेतावनी बोर्ड लगाने, तथा पुराने पुल की मरम्मत या वैकल्पिक व्यवस्था करने की मांग की है। लोगों का कहना है कि प्रशासन अक्सर हादसे के बाद ही जागता है, जबकि समय रहते कार्रवाई कर ली जाए तो कई जिंदगियों को बचाया जा सकता है।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर समस्या को कब तक नजरअंदाज करता है या फिर किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जा रहा है।




