स्पेशल फीचर | राष्ट्रीय सुरक्षा के सूत्रधार

अजीत डोभाल: ‘भारत के जेम्स बॉन्ड’ की पूरी कहानी

जन्म से लेकर NSA बनने तक, शिक्षा, UPSC, खुफिया ऑपरेशन और ऐतिहासिक फैसले

भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा नीति के सबसे मजबूत स्तंभ माने जाने वाले अजीत डोभाल देश के पांचवें और वर्तमान राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) हैं। केरल कैडर के रिटायर्ड IPS अधिकारी अजीत डोभाल को उनकी असाधारण खुफिया क्षमताओं और साहसिक अभियानों के कारण ‘भारत का जेम्स बॉन्ड’ कहा जाता है।
प्रारंभिक जीवन और पारिवारिक पृष्ठभूमि
अजीत डोभाल का जन्म 20 जनवरी 1945 को उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले के घिरी बनल्स्यूं गांव में एक गढ़वाली परिवार में हुआ। उनके पिता मेजर जी. एन. डोभाल भारतीय सेना में अधिकारी थे, जिससे देशभक्ति और अनुशासन उनके संस्कारों में रचा-बसा।
शिक्षा और डिग्री
डोभाल ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा किंग जॉर्ज रॉयल इंडियन मिलिट्री स्कूल, अजमेर (अब अजमेर मिलिट्री स्कूल) से प्राप्त की।
इसके बाद उन्होंने 1967 में आगरा यूनिवर्सिटी से इकोनॉमिक्स में मास्टर डिग्री हासिल की।
बाद में उन्हें कई प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों से मानद डॉक्टरेट से सम्मानित किया गया—
आगरा यूनिवर्सिटी (2017) – साइंस में मानद डॉक्टरेट
कुमाऊं यूनिवर्सिटी (2018) – लिटरेचर में मानद डॉक्टरेट
एमिटी यूनिवर्सिटी (2018) – फिलॉसफी में मानद डॉक्टरेट
IPS से खुफिया जगत तक का सफर
1968 में UPSC के जरिए अजीत डोभाल भारतीय पुलिस सेवा (IPS) में शामिल हुए। वह सबसे कम उम्र में कीर्ति चक्र से सम्मानित होने वाले पुलिस अधिकारी बने।
उन्होंने पंजाब और मिजोरम में आतंकवाद विरोधी अभियानों में अहम भूमिका निभाई और बाद में इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के निदेशक भी रहे (2004–2005)।
पाकिस्तान में अंडरकवर मिशन
कहा जाता है कि अजीत डोभाल ने पाकिस्तान में सात साल एक अंडरकवर एजेंट के रूप में बिताए। इस दौरान उन्होंने आतंकी संगठनों की जड़ों तक पहुंचकर महत्वपूर्ण सूचनाएं जुटाईं। बाद में उन्होंने इस्लामाबाद स्थित भारतीय उच्चायोग में भी कार्य किया।
ऐतिहासिक ऑपरेशन और राष्ट्रीय सुरक्षा
ऑपरेशन ब्लू स्टार (1984): खालिस्तानी उग्रवाद के खिलाफ खुफिया जानकारी जुटाने में अहम भूमिका
कश्मीर मिशन (1990): आतंकवादियों को मुख्यधारा में लाने की रणनीति, जिससे 1996 के विधानसभा चुनाव संभव हुए
IC-814 कंधार अपहरण (1999): यात्रियों की रिहाई के लिए तीन वार्ताकारों में शामिल
15 विमान अपहरण मामलों का सफल समाधान
सर्जिकल स्ट्राइक (2016) और बालाकोट एयरस्ट्राइक (2019) की रणनीतिक निगरानी
डोकलाम गतिरोध के समाधान में निर्णायक भूमिका
इराक मिशन: 46 भारतीय नर्सों की सुरक्षित वापसी
2014 में, इराक के तिकरित में फंसी 46 भारतीय नर्सों की सुरक्षित रिहाई सुनिश्चित करने के लिए अजीत डोभाल स्वयं एक टॉप-सीक्रेट मिशन पर गए। स्थानीय हालात समझकर उन्होंने इराक सरकार के शीर्ष अधिकारियों से संपर्क साधा और 5 जुलाई 2014 को सभी नर्सों को सकुशल भारत वापस लाया गया।
सादा जीवन, असाधारण कार्य
बहुत कम लोग जानते हैं कि अजीत डोभाल रोजमर्रा के कामों में मोबाइल फोन या इंटरनेट का इस्तेमाल नहीं करते। वे केवल आवश्यक पारिवारिक या अंतरराष्ट्रीय संवाद के लिए ही फोन का उपयोग करते हैं।
निष्कर्ष
अजीत डोभाल सिर्फ एक अधिकारी नहीं, बल्कि भारत की रणनीतिक सोच, साहस और गोपनीयता के प्रतीक हैं। पर्दे के पीछे रहकर देश की सुरक्षा को नई दिशा देने वाले डोभाल आज भी भारत की सबसे बड़ी ताकतों में गिने जाते हैं।

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