केंद्र ने 75 % आरक्षण की सीमा को बढ़ाने के लिये मना किया कहा नीतिश कुमार ने।
■जातिगत जनगणना के आधार पर बिहार में आरक्षण का दायरा 75 प्रतिशत तक बढ़ाने का प्रस्ताव
सीएम नीतीश ने आज सदन मे विधेयक पर कहा कि बिहार में आरक्षण की सीमा को बढ़ाने के लिए हम लोग केंद्र से मिलने गए थे।लेकिन हमे मना कर दिया गया।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जातिगत जनगणना के आधार पर बिहार में आरक्षण का दायरा 75 प्रतिशत तक बढ़ाने का प्रस्ताव लेकर आई थी। सदन में चर्चा के बाद गुरुवार को यह प्रस्ताव सर्वसम्मति से पास कर लिया गया और विधानसभा ने आरक्षण के दायरे को बढ़ाने की मंजूरी प्रदान की गई।
इसके बाद तालियों की गड़गड़ाहट के बीच विधानसभा ने आरक्षण का दायरा बढ़ाकर 75 फीसदी करने का विधेयक पास कर दिया।
बिल को अब विधान परिषद में पेश किया जाएगा।
ऐसे समझिए आरक्षण का नया फार्मूला
– दलित- पिछड़ा वर्ग को 15 फीसदी अधिक कोटा
– अति पिछड़ा वर्ग को 07 फीसदी अधिक का लाभ
– पिछड़ा वर्ग को अब 6 फीसदी अधिक आरक्षण
– अनुसूचित जाति- जनजाति का कोटा 04 फीसदी बढ़ेगा
– आर्थिक रूप से पिछड़े सवर्णों का कोटा 10 फीसदी ही रहेगा
– 25 फीसदी अनारक्षित सीटों के लिए चयन मेधा से होगा
आपको बता दें कि 1992 में सुप्रीम कोर्ट ने इंदिरा साहनी मामले में फैसला सुनाते हुए जातिगत आधारित आरक्षण की अधिकतम सीमा 50 फीसदी तय कर दी थी. SC के इसी फैसले के बाद कानून ही बन गया कि 50 फीसदी से ज्यादा आरक्षण नहीं दिया जा सकता।
हालांकि, साल 2019 में केंद्र सरकार ने सामान्य वर्ग को आर्थिक आधार पर 10 प्रतिशत आरक्षण देने के लिए संविधान में संशोधन का विधेयक पारित कर दिया।
इससे आरक्षण की अधिकतम 50 फीसदी सीमा के बढ़कर 60 प्रतिशत हो जाने का रास्ता आसान हो गया है।
उसके बाद कई राज्यों ने आरक्षण की सीमा बढ़ाने का फैसला किया और मामला तुरंत कोर्ट में पहुंचा. महाराष्ट्र में 2021 में 50 फीसदी के पार जाकर दिए गए मराठा आरक्षण को सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया था.






