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डीएम ने पराली जलाने से होने वाले प्रदूषण की रोकथाम के लिए जनपद स्तरीयअनुश्रवण सेल का किया गठन

■ जनपद स्तरीय तहसील स्तर विकासखण्ड स्तर एवं ग्राम पंचायत स्तर पर सेल एवं उड़न दस्ता भी गठित

देवरिया जिलाधिकारी अखंड प्रताप सिंह ने फसल कटाई के उपरांत पराली जलाने से उत्पन्न होने वाले संभावित प्रदूषण की रोकथाम हेतु जनपद स्तर पर अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) की अध्यक्षता में अनुश्रवण सेल की गठन किया है। इसके साथ ही उन्होंने निर्देश के परिपालन हेतु जनपद स्तरीय, तहसील स्तर, विकासखण्ड स्तर एवं ग्राम पंचायत स्तर पर सेल एवं उड़न दस्ता का गठन किया है, जो वित्तीय वर्ष 2023-24 के खरीफ एवं रबी में लागू रहेगा।
जिलाधिकारी ने तहसील स्तर पर गठित सचल दस्तों को निर्देश दिया है कि फसल कटाई के उपरांत किसी भी स्थिति मे धान की पराली एवं अन्य कृषि अपशिष्ट न जलाये जाये। इस हेतु समस्त लेखपाल एवं ग्राम प्रधानो को सम्मिलित करते हुए एक व्हाटसप ग्रुप बनाया जाये । इसी ग्रुप पर पराली / कृषि अपशिष्ट जलाये जाने की सूचना तत्काल सचल दस्ते को सूचना जा जायेगी । पराली / कृषि अपशिष्ट जलाये जाने की घटना पाये जाने पर सम्बन्धित को दण्डित करने के सम्बन्ध में राजस्व अनुभाग – 10 के शासनादेश के अनुसार क्षतिपूर्ति के वसूली एवं पुनरावृत्ति होने पर सम्बन्धित के विरुद्ध अर्थ दण्ड लगाये जाने के सम्बन्ध मे कार्यवाही सुनिश्चित की जायेगी। जनपद के समस्त गठित सचल दस्ता का दायित्व होगा कि धान कटाई समय से लेकर रबी मे गेहूँ बुवाई तक प्रतिदिन फसल अवशेष जलाने घटना के रोकथाम के लिए की गई कार्यवाही के सतत निगरानी एवं अनुश्रवण करते हुए प्रत्येक कार्यदिवस की सूचना अनिर्वाय रूप से जनपद स्तर पर गठित सेल को निर्धारित प्रारूप पर देगे। इसके उरान्त भी फसल अवशेष जलाये जानी की घटना प्रकाश मे आने पर सूचना जनपद / तहसील स्तर पर गठित सचल दस्तो को सूचित न करने पर सम्बन्धित लेखपाल उतरदायी होगे । सहायक विकास अधिकारी (कृषि) / विषय वस्तु विशेषज्ञ एवं उप सम्भागीय कृषि प्रसार अधिकारी क्षेत्रीय कर्मचारियो के माध्यम से इन सीटू कार्य योजना के कृषि यंत्रो का प्रचार प्रसार एवं यत्र की माध्यम से फसल अवशेष प्रबन्धन कराने हेतु जन जागरण माध्यम से फसल अवशेष न जलाये जाने एवं फसल अवशेष जलाये जाने से दुष्परिणामों से सचेत करते हुए कृषको प्रेरित करेंगे, जिला कृषि अधिकारी द्वारा फसल अवशेष जलाने की घटनाओ एवं इसकी रोकथाम की रिर्पोट अपर जिलाधिकारी (वित्त एव राजस्व) के माध्यम से जिलाधिकारी द्वारा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा गठित समिति को भेजी जायेगी। निर्देशो का कड़ाई से पालन किया जाये।
जिलाधिकारी ने बताया कि जनपद स्तरीय सेल में अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व को अध्यक्ष, जिला कृषि अधिकारी को सदस्य/ सचिव एवं अपर पुलिस अधीक्षक, जिला विकास अधिकारी, जिला गन्ना अधिकारी, जिला पंचायत अधिकारी तथा आपदा विशेषज्ञ को सदस्य नामित किया गया है जो प्रतिदिन अनुश्रवण एवं राज्य मॉनिटरिंग सेल को रिपोर्ट करेंगे।
इसी प्रकार तहसील स्तरीय सेल में उप जिलाधिकारी को अध्यक्ष, क्षेत्राधिकारी एवं सहायक विकास अधिकारी (कृषि) को सदस्य नामित किया गया है, जो धान की कटाई से लेकर गेहूं की बुवाई तक प्रतिदिन मोबाइल स्क्वायर का गठन कर लगातार भ्रमण तथा विकास खंड स्तरीय सेल के रिपोर्टिंग पर विधि कार्रवाई करना सुनिश्चित करेंगे तथा जनपद स्तरीय सेल को सूचना देंगे। विकासखंड स्तरीय सेल में खंड विकास अधिकारी को विकासखंड स्तरीय नोडल अधिकारी, राजस्व निरीक्षक, सहायक विकास अधिकारी (कृषि) एवं थानाध्यक्ष को सदस्य नामित किया गया है, जो प्रतिदिन ग्राम पंचायत स्तरीय सेलों से रिपोर्ट लेकर विधि करवाई करेंगे एवं तहसील स्तरीय सेल को रिपोर्टिंग करेंगे। ग्राम पंचायत स्तरीय सेल में लेखपाल को अध्यक्ष, ग्राम प्रधान, ग्राम पंचायत के कृषि विभाग के कर्मचारी एवं हल्का पुलिसकर्मी को सदस्य नामित किया गया है जो प्रतिदिन क्षेत्र का भ्रमण करेंगे एवं उक्त सेलों को रिपोर्ट करेंगे।
तहसील स्तरीय सचल दस्ता में उप जिलाधिकारी को पर्यवेक्षीय अधिकारी नामित किया गया है, जिसमें तहसीलदार, उप संभागीय कृषि प्रसार अधिकारी थाना अध्यक्ष संबंधित तहसील मुख्यालय को शामिल किया गया है। विकासखंड स्तरीय सचल दस्ता में खंड विकास अधिकारी को पर्यवेक्षीय अधिकारी नामित कर नायब तहसीलदार/ कानूनगो एवं सहायक विकास अधिकारी कृषि को सम्मिलित किया गया है।

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