*जी-20 शिखर सम्मेलन की चर्चा आज पूरे विश्व में*
भारत की अध्यक्षता में दो दिनों तक चले जी-20 शिखर सम्मेलन की चर्चा आज पूरे विश्व में हो रही है। दुनिया ने भारत की संस्कृति के साथ-साथ भारत में महमान नवाजी कैसे होती है, यह भी देखी। भारत की इस मेजबानी से राष्ट्राध्यक्षों के साथ साथ उनकी पत्नियां भी चर्चा का विषय बनी रहीं। सोशल मीडिया पर विभिन्न राष्ट्र प्रमुखों और उनकी पत्नियों ने खूब सुर्खियां बटोरी। विदेशी महमान मंडपम के अलावा राजघाट और अक्षरधाम मंदिर भी गए। इसमें ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक और उनकी पत्नी अक्षता मूर्ति, इटली की प्रधानमंत्री जार्जिया मेलोनी और अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन सोशल मीडिया एक्स पर रविवार को पूरे दिन ट्रेंड पर बने रहे।
शुक्रवार को अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन का भारतीय परंपराओं के साथ स्वागत किया गया। मंडपम में हुई दोनों नेताओं की मुलाकात में एक अलग ही केमिस्ट्री दिखाई दी। जैसे ही बाइडेन पीएम मोदी से मिले तो उन्होंने आगे बढ़ते हुए हाथ मिलाया और फिर उनके कंधे पर हाथ रखा। गहरी दोस्ती के इस यादगार पल को लोगों ने एक्स पर खूब शेयर किया।
संगीतकारों ने अपने-अपने क्षेत्र की पारंपरिक पोशाक पहनकर वाद्ययंत्र के साथ प्रस्तुति दी। इसकी शुरुआत हिन्दुस्तानी संगीत में राग दरबारी कांदा और काफी-खेलत होरी से हुई। इसी तरह राजस्थान के लोक गीत केसरिया बालम और घूमर की प्रस्तुति हुई। कर्नाटक संगीत में राग मोहनम में स्वागतम कृष्ण की प्रस्तुति हुई। भक्ति संगीत परंपरा की भी खूब धारा बही।
जी20 शिखर सम्मेलन में रूस-यूक्रेन युद्ध पर प्रमुख मतभेदों को दूर करते हुए सदस्य देशों के शनिवार को नई दिल्ली लीडर्स समिट डिक्लेरेशन को अपनाया जाना प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लिए एक अप्रत्याशित सफलता है। हालांकि, इसमें यूक्रेन पर रूस के हमले का जिक्र करने से परहेज किया गया। मीडिया के अनुसार, ऐसा लगता है कि अंतिम समझौता वक्तव्य में अमेरिका और उसके पश्चिमी सहयोगियों द्वारा रूस को लेकर अपनाये गये रुख की तुलना में कहीं अधिक नरम रुख अपनाया गया है
नई दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय जी20 शिखर सम्मेलन में वैश्विक नेताओं के बीच घोषणापत्र को लेकर सहमति बनी। घोषणापत्र में जलवायु परिवर्तन और आर्थिक विकास पर साझा विचार रखे गये, लेकिन इसमें यूक्रेन पर रूस के हमले की निंदा करने से बचा गया।
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने शिखर सम्मेलन के दौरान अपना अधिकतर समय नरेन्द्र मोदी के साथ अपने संबंधों को और मजबूत करने में बिताया। अखबार ने विदेश नीति के दिग्गज रिचर्ड एन. हास के हवाले से कहा, ”पिछले राष्ट्रपतियों की तरह, बाइडन भी भारत को करीब लाने की कोशिश कर रहे हैं।”
बीबीसी ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि घोषणापत्र पश्चिम और रूस दोनों को सकारात्मकता खोजने का रास्ता दिखाने के लिए डिजाइन किया गया है।





