दुधवा टाइगर रिजर्व में पहली बार होगी तेंदुओं की गणना, 1800 कैमरों से तैयार होगा डिजिटल रिकॉर्ड
■ वर्ष 2026 की बाघ गणना में पहली बार तेंदुओं को भी किया गया शामिल।
■किशनपुर, बफर जोन और कतर्नियाघाट में लगाए गए 1800 कैमरा ट्रैप।
■भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई), देहरादून करेगा तस्वीरों का डिजिटल विश्लेषण।
■वर्ष 2022 में दुधवा में 153 बाघ दर्ज, देश में मिला था चौथा स्थान।
■वर्तमान में लगभग 100 तेंदुओं का अनुमान, गणना से सामने आएगी वास्तविक संख्या।
■दुधवा में 53 एक सींग वाले गैंडे और पांच प्रजातियों के हिरन मौजूद।
वर्ष 2027 में जारी होंगे बाघ और तेंदुओं की संयुक्त गणना के परिणाम।
विस्तृत समाचार
लखीमपुर खीरी। उत्तर प्रदेश के प्रसिद्ध दुधवा टाइगर रिजर्व में वन्यजीव संरक्षण की दिशा में इस बार एक नई पहल की गई है। वर्ष 2026 की बाघ गणना के दौरान पहली बार तेंदुओं की भी वैज्ञानिक गणना की जा रही है। अब तक कैमरा ट्रैप का उपयोग केवल बाघों की संख्या और उनके विचरण क्षेत्र का आकलन करने के लिए किया जाता था, लेकिन इस बार कैमरों में कैद तेंदुओं की तस्वीरों का भी अलग से विश्लेषण किया जाएगा।
दुधवा टाइगर रिजर्व के किशनपुर वन्यजीव अभयारण्य, बफर जोन और कतर्नियाघाट वन्यजीव विहार में लगभग 1800 कैमरा ट्रैप लगाए गए हैं। इन कैमरों से प्राप्त तस्वीरों का अध्ययन भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई), देहरादून के विशेषज्ञ कर रहे हैं। प्रत्येक कैमरा ट्रैप से प्राप्त डिजिटल डाटा का विश्लेषण कर यह पता लगाया जाएगा कि रिजर्व में तेंदुओं की वास्तविक संख्या कितनी है और उनका विचरण क्षेत्र किन इलाकों में फैला हुआ है।
वर्ष 2022 की पिछली बाघ गणना में दुधवा टाइगर रिजर्व में 153 बाघ दर्ज किए गए थे, जिसके आधार पर दुधवा को देश के प्रमुख बाघ अभयारण्यों में चौथा स्थान प्राप्त हुआ था। वन विभाग के अधिकारियों का अनुमान है कि वर्तमान में यहां करीब 100 तेंदुए मौजूद हैं, लेकिन पहली बार होने वाली वैज्ञानिक गणना से उनकी वास्तविक संख्या स्पष्ट हो सकेगी।
दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर डॉ. एच. राजामोहन ने बताया कि वर्ष 2027 में गणना के अंतिम परिणाम जारी किए जाएंगे। इसके बाद बाघों और तेंदुओं दोनों की सटीक संख्या तथा उनके वितरण का वैज्ञानिक आकलन उपलब्ध होगा, जिससे संरक्षण योजनाओं को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।
दुधवा टाइगर रिजर्व अपनी समृद्ध जैव विविधता के लिए भी देशभर में प्रसिद्ध है। यहां 53 एक सींग वाले भारतीय गैंडे पाए जाते हैं, जिनमें 17 नर, 25 मादा और 11 शावक एवं उप-वयस्क शामिल हैं। इसके अलावा दुधवा उन चुनिंदा क्षेत्रों में शामिल है जहां बारहसिंगा, सांभर, चीतल, हॉग डियर और काकड़ जैसी हिरनों की पांच प्रमुख प्रजातियां एक साथ पाई जाती हैं।
उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के तराई क्षेत्र में स्थित दुधवा नेशनल पार्क हर वर्ष बड़ी संख्या में देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित करता है। पार्क नवंबर से जून तक पर्यटकों के लिए खुला रहता है, जहां बाघ, गैंडा, हाथी, तेंदुआ और अन्य दुर्लभ वन्यजीवों के साथ प्राकृतिक जैव विविधता का अद्भुत नजारा देखने को मिलता है।





