NEET–MBBS Admission: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला — फीस न भर पाने वाली छात्रा को नहीं मिली राहत, लेकिन टेक्निकल दिक्कत वाले छात्रों को मिला मौका
NEET-UG 2025–26 के एमबीबीएस एडमिशन को लेकर सुप्रीम कोर्ट के दो अलग-अलग फैसले सामने आए हैं। तमिलनाडु की एक छात्रा, जो आर्थिक दिक्कतों की वजह से 15 लाख रुपये की फीस समय पर जमा नहीं कर पाई, उसे कोर्ट ने कोई राहत नहीं दी। वहीं, तकनीकी समस्या के कारण फीस नहीं भर पाने वाले तीन उम्मीदवारों को सुप्रीम कोर्ट ने मौका दे दिया है।
पहला मामला: आर्थिक दिक्कतों के चलते फीस न भर पाने वाली छात्रा को राहत नहीं
तमिलनाडु की छात्रा शिल्पा सुरेश को 251 अंक के साथ MBBS में सीट तो मिली थी, लेकिन 8 नवंबर 2025 तक 15 लाख रुपये जमा न कर पाने के चलते वह दाखिले से चूक गई।
छात्रा ने मद्रास हाई कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक राहत मांगी।
हाई कोर्ट की सिंगल बेंच ने उसे एडमिशन देने का निर्देश भी दिया था।
लेकिन हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने आदेश रद्द कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने भी साफ कहा:
प्रॉस्पेक्टस और शेड्यूल सभी के लिए समान है, इसे बदला नहीं जा सकता।
“कई स्टूडेंट्स ऐसी स्थिति में हो सकते हैं, सबके लिए नियम समान रहेंगे।”
कोर्ट ने छात्रा को सलाह भी दी कि वह किसी दूसरे करियर विकल्प पर ध्यान दे और निराश न हो।
दूसरा मामला: टेक्निकल दिक्कत से फीस न भर पाने वाले छात्रों को मिला मौका
जिन तीन छात्रों की फीस बैंक हॉलिडे या तकनीकी समस्या की वजह से जमा नहीं हो पाई थी, उन्हें सुप्रीम कोर्ट ने राहत दे दी है।
जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस एएस चंदूरकर की बेंच ने फैसला सुनाया।
छात्रों को 10 दिसंबर तक फीस भरने की अनुमति दी गई।
कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि उन्हें मैनेजमेंट कोटा की खाली सीटें अलॉट की जाएं।
कोर्ट ने कहा:
“छात्रों को उन कारणों से एमबीबीएस प्रवेश से वंचित न करें, जो उनकी पहुंच से बाहर हों।”
हांलांकि अदालत ने स्पष्ट कर दिया कि यह आदेश भविष्य के मामलों के लिए मिसाल नहीं माना जाएगा।
दोनों फैसलों में फर्क
मामला वजह सुप्रीम कोर्ट का निर्णय
आर्थिक दिक्कत 15 लाख की फीस एक दिन देर से जुटी राहत नहीं
तकनीकी दिक्कत बैंक हॉलिडे/नेटवर्क समस्या फीस जमा करने का मौका दिया



