अब सड़क पर घायल हुआ तो जेब नहीं, ज़िंदगी देखी जाएगी — देश में लागू हुआ ‘गोल्डन ऑवर कैशलेस इलाज सिस्टम’

देवरिया। भारत सरकार ने सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों को रोकने के लिए एक ऐसा सिस्टम लागू किया है, जो पहली बार हादसे के बाद के सबसे कीमती 60 मिनट (Golden Hour) को सीधा सरकार से जोड़ देता है। इसका नाम है —
Cashless Treatment of Road Accident Victim Scheme।
इस योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि अब कोई भी घायल व्यक्ति अस्पताल में पैसे, पहचान या बीमा के अभाव में इलाज से वंचित नहीं रहेगा।
देवरिया बना सिस्टम-रेडी जिला
09 जनवरी 2026 को पुलिस लाइन देवरिया के सभागार में जिले के सभी थानों के उप निरीक्षकों को इस हाई-टेक योजना पर विशेष प्रशिक्षण दिया गया।
यह प्रशिक्षण जिला कलेक्ट्रेट और एनआईसी कार्यालय की संयुक्त पहल से आयोजित हुआ।
प्रशिक्षण देने वाले:
जिला रोल-आउट मैनेजर – श्री सौरभ गुप्ता
जिला सूचना विज्ञान अधिकारी – श्री कृष्णानंद यादव
कार्यक्रम हुआ:
अपर पुलिस अधीक्षक (दक्षिणी) श्री सुनील कुमार सिंह के निर्देशन में
यातायात कार्यालय से टीएसआई श्री गुलाब सिंह के सहयोग से
अब सड़क हादसा होते ही एक्टिव होगा डिजिटल सिस्टम
इस योजना के तहत अब हर सड़क दुर्घटना सिर्फ पुलिस डायरी नहीं बल्कि एक डिजिटल मेडिकल केस बन जाएगी।
जैसे ही कोई घायल अस्पताल पहुंचता है:
अस्पताल तुरंत Patient ID बनाता है
वह आईडी सीधे TMS Portal से संबंधित थाना प्रभारी की e-DAR ID में जाती है
पुलिस 24 घंटे में दुर्घटना की जांच कर Accident ID (Victim ID) जारी करती है
यह आईडी मरीज की आईडी से मैप होती है
केस अपने आप Cashless Scheme में जुड़ जाता है
गंभीर मामलों में पुलिस को 48 घंटे तक वेरिफिकेशन का समय मिलता है।
एक ही पोर्टल से पूरा हादसा मैनेज
अब ई-DAR पोर्टल से:
वाहन की तकनीकी जांच → ARTO को
सड़क की जांच → PWD इंजीनियर को
केस डिटेल्स → बीमा और सरकार को
सब कुछ डिजिटल रूप से भेजा जाएगा।
मतलब अब हादसे के बाद न फाइलें भटकेंगी, न पीड़ित।
क्या मिलेगा पीड़ित को?
✔️ प्रति दुर्घटना ₹1.5 लाख तक का पूरा मुफ्त इलाज
✔️ 7 दिन तक इलाज कवर
✔️ सरकारी और चयनित निजी अस्पतालों में सुविधा
✔️ बीमा या पहचान अनिवार्य नहीं
✔️ विदेशी नागरिक भी पात्र
अस्पताल मरीज से पैसे नहीं ले सकता —
वह बिल सीधे सरकार को भेजेगा।
अब मौत की नहीं, इलाज की दौड़ होगी
अब तक सड़क हादसों में सबसे ज्यादा मौतें इसलिए होती थीं क्योंकि लोग अस्पताल पहुँचने के बाद भी
“पैसे जमा करिए”
सुनते थे।
अब सिस्टम बदल गया है।
अब पहला सवाल होगा —
“घायल कहाँ है?”
न कि —
“पैसे हैं या नहीं?”
देवरिया पुलिस और प्रशासन के इस प्रशिक्षण के साथ जिला अब देश के सबसे एडवांस्ड रोड एक्सीडेंट रेस्पॉन्स सिस्टम से जुड़ चुका है।

Share.