विवाह पंचमी के दिन 6 दिसंबर को रंग महल मंदिर में सीता राम का होगा विवाह अवध और मिथिला की रीति रिवाज में होगा संपन्न ।
■संतो द्वारा विवाह गीत गाकर व रामलीला मंचन मे धनुष यज्ञ उपरान्त परंपरागत विवाह कार्यक्रम की हुई शुरुवात।
■मंदिर के श्रीमहंत रामशरण दास जी महाराज पीठाधीश्वर अयोध्या धाम के अनुसार अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण के बाद विवाह पंचमी का उत्सव और भी हुआ खास ।
आपको बता दे कि मंदिर और मूर्तियों की नगरी अयोध्या में लगभग 8000 से भी ज्यादा मठ मंदिर हैं और सभी मठ मंदिरों की अपनी अलग परंपरा और मान्यता है।
वहीअयोध्या नगर में प्रभु श्रीराम राजा राम के विवाह की तैयारी चल रही है।
विवाह के रीत रिवाज की रस्म भी शुरू हो चुकी है।
विवाह पंचमी के दिन 6 दिसंबर को रंग महल मंदिर में 300 वर्ष पुराने पौराणिक विवाह मंडप में श्रीराम संग सीता जी का विवाह होगा।
यह विवाह अवध और मिथिला की रीति रिवाज में संपन्न होगा।
राम जन्मभूमि प्राचीन मार्ग पर स्थित रसिक संप्रदाय के प्राचीन रंग महल मंदिर में विवाह उत्सव की धूम है।
आज से रंगमहल मे विवाह कार्यक्रम का आयोजन प्रारंभ हो होगा। लेकिन इससे पहले मंदिर के मध्य प्राचीन माड़व मंडप को स्थापित कर दिया गया है।
संतो द्वारा विवाह गीत गाकर व रामलीला मंचन मे धनुष यज्ञ उपरान्त परंपरागत विवाह कार्यक्रम की शुरुवात कर दी गई है।
रसिक संप्रदाय के अति प्राचीन मंदिर रंग महल के बारे में ग्रंथों में उल्लेख है।
मंदिर के श्रीमहंत रामशरण दास का कहना है कि यह महल माता कौशल्या की कुलदेवता रंग जी महाराज का था. माता कौशल्या उनकी सेवा करती थी. जब श्रीराम सहित चारों भाई विवाह उपरांत अयोध्या आए, तो फाल्गुन के महीने में सीता जी ने पहली रंगों की होली यहां खेली थी।
मंदिर अति प्राचीन है रसिक संप्रदाय की परंपरा में साधु स्त्री वेश में माता सीता की उपासना करते हैं। इस दौरान विभिन्न प्रकार के पकवान का भोग लगाया जाता है सुगंधित फूलों से आरती की जाती है।
4 दिसंबर को फुलवारी और नगर भ्रमण का कार्यक्रम होगा।
5 दिसंबर को धनुषयज्ञ, परशुराम लक्ष्मण संवाद का कार्यक्रम संपन्न हुआ और 6 दिसंबर विवाह पंचमी के दिन घुड़चढ़ी बारात और विवाह उत्सव की तैयारी कर आज बारात नगर मे भ्रमण करेगी।
अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण के बाद विवाह पंचमी का उत्सव और भी खास हो गया
है ।
पूरे मंदिर परिसर को विभिन्न रंगों की लाइटों से सजाया गया है।
मंदिर परिसर में साधू संत विवाह गीत का गायन कर रहे हैं।




