कथा के प्रथम दिन हुयी माता पिता की सेवा भक्ति पर चर्चा परम पूज्य श्री रमाकांत व्यास की मुखारविंद से
■अल्पकाल में ही श्रवण कुमार की तपस्या से भगवान नारायण हुये प्रसन्न।
तीसरे दिन कथा व्यास परम पूज्य श्री रमाकान्त व्यास शास्त्री ने शनिवार को कथा के प्रथम दिवस में धुंधकुमारी की कथा के माध्यम से श्रोताओं को भक्ति और दृढ़ संकल्प के विस्तार से समझाया। उन्होंने कहा कि भक्ति मार्ग ही सर्वोपरि है भक्ति की राय पर चलकर बड़े-बड़े संकट भी भगवान हर लेते हैं हमें अपने माता-पिता की सेवा नित्य करना चाहिए जो लोग अपने माता-पिता को वृद्धआश्रम श्रम भेजने की सोच रखते हैं भगवान उनके साथ भी वैसा ही करेगा आज के समय मे भगवान नारायण के अतिरिक्त तुम्हारे दुःख को दूर करने वाला और कोई नहीं है। तू केवल उनकी भक्ति कर।
इसलिए हमें समझना चाहिए नाम जप व दृढ संकल्प से ईश्वर शीघ्र प्रसन्ना होकर हमारा कल्याण करते हैं। साथ ही कथा के बीच समय-समय पर संगीतमय भजनों की प्रस्तुति से श्रोता झूमते नाचते नजर आ रहे थे।
हमें तन मन धन से प्रभु अस्था में तल्लीन रहना चाहिए आज के समय में धन होते हुए भी किसी न किसी वजह से लोग बीमारियों से भी ग्रस्त हैं जिस कारण दो समय का भोजन भी ग्रहण कर पाने में सक्षम नहीं है अतः हमें प्रभु भक्ति में तन मन धन से प्रभु में लीन रहने की आवश्यकता है।






