ब्रह्मपुराण मे संगम स्नान का फल अश्वमेध यज्ञ के समान फलदायी कहा गया |Prayagraj | KumbhMelav| Sangam
प्रयागराज में गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती नदियों के संगम स्थल को त्रिवेणी संगम कहा जाता है, जो हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र माना जाता है। मान्यता है कि यहां स्नान करने से व्यक्ति के पाप धुल जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है। प्रत्येक बारहवें वर्ष यहां महाकुंभ का आयोजन होता है, जिसमें लाखों श्रद्धालु संगम में डुबकी लगाते हैं।
हाल ही में, महाकुंभ 2025 के अवसर पर मौनी अमावस्या के दिन त्रिवेणी संगम पर लाखों श्रद्धालुओं ने पवित्र स्नान किया। सुबह 8 बजे तक 41.90 लाख से अधिक भक्तों ने आस्था की डुबकी लगाई।
महाकुंभ के दौरान शाही स्नान का विशेष महत्व होता है, जिसमें अखाड़ों के साधु-संत पारंपरिक रूप से स्नान करते हैं। इस अवसर पर संगम तट पर श्रद्धालुओं का विशाल जनसैलाब उमड़ता है, जो आस्था और भक्ति का प्रतीक है।
त्रिवेणी संगम में स्नान करने से व्यक्ति को अश्वमेध यज्ञ के समान फल की प्राप्ति होती है। ब्रह्मपुराण के अनुसार, संगम स्नान का फल अश्वमेध यज्ञ के समान फलदायी कहा गया है।
महाकुंभ 2025 के दौरान, श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुगम स्नान के लिए प्रशासन द्वारा विशेष प्रबंध किए गए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा एवं सुगम स्नान को सरकार की प्राथमिकता बताया है।
संगम पर उमड़ती भीड़ आस्था और विश्वास का प्रतीक है, जो भारतीय संस्कृति की गहराई को दर्शाती है।
महाकुंभ 2025 के दौरान त्रिवेणी संगम पर श्रद्धालुओं की भीड़ का दृश्य देखने के लिए,
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