मां शैलपुत्री के रूप में दर्शन 

ज्ञान की देवी सरस्वती मां शारद का मां शैलपुत्री के रूप में दर्शन – शक्ति पीठ बैरागढ़

यहां नवरात्र ही नहीं बल्कि 12 महीने 365 दिन लोग दर्शन के लिए आते हैं. नवरात्र में तो यहां पर भव्य तरीके से आयोजन किए जाते हैं. यह मंदिर आखिरी हिन्दू राजा पृथ्वीराज और बुन्देलखंड के वीर योद्धा आल्हा-ऊदल के युद्ध का का भी गवाह रहा है.

यहां पर ज्ञान की देवी सरस्वती मां शारदा के रूप में विराजमान हैं. मां शारदा देवी की अष्टभुजी मूर्ति लाल पत्थर से निर्मित है. मां शारदा का शक्ति पीठ बैरागढ़ मन्दिर की स्थापना चन्देलकालीन राजा टोडलमल द्वारा ग्यारहवीं सदी में कराई गई थी

एट से पांच किलोमीटर दूर बैरागढ़ स्थित शक्तिपीठ मां शारदा देवी का हर नवरात्रि में भव्य मेला लगता है पिछले 2 साल से कोरोना महामारी के चलते मंदिर के पट बंद रहे लोगों का आना जाना भी बंद रहा इस बार नवरात्र में कोरोना से राहत मिलते ही लोगों का आना-जाना रहा जिसमें आज प्रथम दिन मां शैलपुत्री के रूप में माता के दर्शन किए गये

बैरागढ़ धाम के पुजारी शारदा शरण द्विवेदी जी ने बताया कोरोना दो साल से भक्तों का आना आगमन कम रहा इस साल हजारों की संख्या में भक्तगण आ रहे हैं दिन रात भक्त का आ रहे हैं

बैरागढ़ धाम में दर्शन के लिए आए हुए श्रद्धालु तनु शर्मा ,राहुल उपाध्याय, आलोक यादव, अभिषेक शर्मा वीरेंद्र दाऊ, मोनू यादव तमाम युवाओं ने दर्शन किए और बोले दर्शन करके अच्छा लगा मेला लगता है दूर-दूर गांव के लोग आते हैं 2 साल से नहीं आ पा रहे थे कोरोना की वजह से अब मेला भी चालू हो जाएगा और दर्शन भी होंगे

यहां पर जिले के अलावा गैर जनपदों से भी लोग आते जाते हैं। खासकर नवरात्र पर, कोई मनोकामनाएं पूरी होने पर कोई डला लेकर पहुंचता है तो कोई सूनी गोद भरने के लिए पूजा अर्चना करने आता है

 

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