नेपाल-तिब्बत सीमा पर जलप्रलय से तबाही, 675 लोगों की मौत; 2,400 से अधिक लापता
Focus News 24×7 | विशेष रिपोर्ट
काठमांडू/तिब्बत। नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में बुधवार को आई भीषण बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी है। तेज बहाव के साथ आए पानी, मलबे और मिट्टी ने कई इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया। नेपाल में अब तक 675 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 2,400 से अधिक लोग लापता बताए जा रहे हैं। राहत और बचाव अभियान लगातार पांचवें दिन भी जारी है।
बताया जा रहा है कि आपदा से प्रभावित क्षेत्र में हजारों राहतकर्मी खोज और बचाव अभियान में जुटे हैं। नेपाल में 18,700 से अधिक बचावकर्मियों को अभियान में लगाया गया है। नेपाल-तिब्बत सीमा के आसपास कई स्थानों पर सड़क, पुल और जलविद्युत परियोजनाएं भी प्रभावित हुई हैं।
ग्लेशियर टूटने से आई विनाशकारी बाढ़
शुरुआत में सीमा क्षेत्र में भूकंप की खबर सामने आने के बाद आशंका जताई गई थी कि भूकंप के कारण भूस्खलन हुआ और उसके बाद बाढ़ आई। बाद में वैज्ञानिक आकलन में सामने आया कि आपदा की मुख्य वजह ग्लेशियर का अचानक टूटकर ढहना थी।
ग्लेशियर के बड़े हिस्से के घाटी में गिरने से अत्यधिक शक्तिशाली प्रभाव पैदा हुआ। इसके बाद पानी और मलबे का सैलाब नदियों के रास्ते तेजी से नीचे की ओर बढ़ा। इसका असर करीब 100 किलोमीटर तक दिखाई दिया। त्रिशूली और भोटे कोशी नदियों के आसपास बसे कई कस्बे इसकी चपेट में आए।
दूसरी बाढ़ का भी खतरा
आपदा के बाद नदी में बड़ी मात्रा में मलबा जमा होने से आने वाले दिनों में दूसरी बाढ़ का खतरा भी बना हुआ है। संकरे इलाकों में मलबे के कारण नदी का प्रवाह अस्थायी रूप से रुकने पर प्राकृतिक बांध जैसी स्थिति बन सकती है। यदि यह अवरोध टूटता है तो अचानक तेज पानी नीचे की ओर आने की आशंका है।
इसी वजह से प्रभावित क्षेत्रों में बचाव एजेंसियां लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं।
तिब्बत में भी भारी नुकसान
तिब्बत में भी इस आपदा का व्यापक असर हुआ है। वहां आधिकारिक तौर पर 7 लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है, जबकि 554 लोग लापता बताए गए हैं। प्रभावित इलाकों में सूचना और संचार व्यवस्था सीमित होने के कारण नुकसान का वास्तविक आंकड़ा सामने आने में समय लग रहा है।
बाढ़ के बाद बनी एक झील के जलस्तर को लेकर भी चिंता जताई गई थी। आशंका थी कि जलस्तर बढ़ने पर झील का पानी आसपास के क्षेत्रों में भारी तबाही मचा सकता है। हालांकि अधिकारियों के अनुसार अब इसका जलस्तर धीरे-धीरे कम हो रहा है।
विदेशी नागरिक भी प्रभावित
आपदा क्षेत्र में बड़ी संख्या में विदेशी नागरिक भी मौजूद थे। पर्यटन अधिकारियों के अनुसार 261 विदेशी नागरिकों को सुरक्षित निकाल लिया गया है, जबकि 320 विदेशी नागरिक अभी लापता बताए जा रहे हैं।
बचाए गए विदेशी नागरिकों में भारत के 167 नागरिक शामिल हैं। इसके अलावा चीन, यूक्रेन, जर्मनी, अमेरिका, स्विट्जरलैंड, इटली, रूस, तुर्की सहित कई देशों के नागरिक भी प्रभावित क्षेत्र से सुरक्षित निकाले गए हैं।
जलविद्युत परियोजनाओं में फंसे लोगों की तलाश
बाढ़ से प्रभावित जलविद्युत परियोजनाओं में भी बचाव अभियान जारी है। त्रिशूली-3 ‘ए’ जलविद्युत परियोजना के केबल टनल में बचाव दल ने सुरंग तक पहुंच बनाने के लिए ड्रिलिंग कर रास्ता बनाने का प्रयास किया है।
प्रारंभिक निरीक्षण में सुरंग के अंदर मलबा नहीं मिलने की जानकारी सामने आई है, लेकिन अभी तक वहां मौजूद लोगों से संपर्क स्थापित नहीं हो सका है। बचाव दल मुख्य सुरंग तक पहुंचने के लिए रास्ता बनाने में जुटा है।
लगातार बारिश के कारण नदी का जलस्तर बढ़ने से राहत और बचाव कार्य प्रभावित होने की आशंका भी बनी हुई है। भारत और चीन की विशेषज्ञ टीमें भी नेपाली बचाव दल के साथ अभियान में सहयोग कर रही हैं।
राहत कार्य जारी, हालात पर नजर
नेपाल में राहत और बचाव अभियान युद्धस्तर पर जारी है। प्रशासन की प्राथमिकता लापता लोगों को तलाशना, प्रभावित नागरिकों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना और बाढ़ से कटे इलाकों में राहत सामग्री पहुंचाना है।
Focus News 24×7 की ग्राउंड विजिट में सामने आए हालात इस प्राकृतिक आपदा की भयावहता को दर्शाते हैं। प्रभावित क्षेत्रों में तबाही के निशान अभी भी मौजूद हैं और हजारों परिवार अपनों की तलाश में राहत शिविरों तथा प्रशासनिक केंद्रों के चक्कर लगा रहे हैं।
रिपोर्ट: Focus News 24×7 संवाददाता






