जालौन में 200 साल पुराना ऐतिहासिक ताईबाई महल धराशायी
■ कभी इसी ऐतिहासिक भवन में संचालित होती थी तहसील, जर्जर हालत के चलते पहले ही हो चुकी थी शिफ्ट
जालौन। नगर के मध्य स्थित करीब 200 वर्ष पुराने ऐतिहासिक ताईबाई महल का एक हिस्सा अचानक धराशायी हो गया। यह वही ऐतिहासिक भवन है, जिसे लंबे समय तक तहसील भवन के रूप में भी इस्तेमाल किया जाता रहा। भवन काफी समय से जर्जर हालत में था और बाद में तहसील को नए भवन में स्थानांतरित कर दिया गया था। तहसील की छुट्टी के दिन भवन गिरने से किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। यदि यह हादसा तहसील के संचालन के दौरान हुआ होता तो बड़ा हादसा हो सकता था।
वीरांगना ताईबाई के इतिहास से जुड़ा है भवन
जालौन का यह प्राचीन भवन मराठा राजवंश की शासिका ताईबाई के इतिहास से जुड़ा बताया जाता है। स्थानीय इतिहास के अनुसार ताईबाई का संबंध वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई और 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम से रहा। उन्होंने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ संघर्ष में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
बताया जाता है कि तात्या टोपे के साथ मिलकर ताईबाई ने अंग्रेजों के खिलाफ मोर्चा संभाला। कानपुर की लड़ाई के बाद भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। अपने आभूषण बेचकर सेना तैयार करने और चरखारी पर आक्रमण कर विजय हासिल करने का भी इतिहास में उल्लेख मिलता है।
स्थानीय इतिहास के अनुसार ताईबाई के नेतृत्व में जालौन, कनार, कालपी, आटा, उरई, मोहम्मदाबाद, कोटरा और कोंच सहित कई क्षेत्रों से अंग्रेजी प्रभाव समाप्त करने के प्रयास किए गए। बाद में अंग्रेजी शासन ने ताईबाई और उनके सहयोगियों पर राजद्रोह एवं विद्रोह के आरोप लगाए और उन्हें आजीवन कारावास की सजा दी। उन्हें जालौन से दूर मुंगेर, बिहार भेज दिया गया, जहां वर्ष 1870 में उनके निधन का उल्लेख मिलता है।
ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण की मांग
ताईबाई से जुड़ी इस ऐतिहासिक धरोहर के धराशायी होने के बाद स्थानीय लोगों में चिंता है। लोगों का कहना है कि जालौन की ऐतिहासिक विरासत और स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े स्थलों को संरक्षित किया जाना चाहिए।
स्थानीय लोग पिछले कई महीनों से प्रथम स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एवं जालौन राज्य की अंतिम शासिका के रूप में स्मरण की जाने वाली ताईबाई की प्रतिमा स्थापित कराने की मांग को लेकर आंदोलन और प्रदर्शन कर रहे हैं। इस संबंध में मुख्यमंत्री समेत जिले के उच्च अधिकारियों को भी ज्ञापन सौंपे जाने की बात सामने आई है।
लोगों की मांग है कि देवनगर चौराहे के प्रस्तावित सुंदरीकरण के बाद वहां वीरांगना ताईबाई की प्रतिमा स्थापित कराई जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियां उनके संघर्ष और जालौन के इतिहास से परिचित हो सकें।
रिपोर्ट—महेश चौधरी, जालौन





