हे मेरे समग्र सृष्टि पटल पर रहने वाले आत्मिक बन्धुओं / भाइयों

रिपोर्ट : डाँ. बनवारी लाल शर्मा पीपर शास्त्री

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परम ईश्वर परमपिता परममाता

सर्वोच्चसत्ता जगद्पिता जगद्‌माता

सर्व नियामक सर्वशक्तिमान परम सत्य यायदाता शक्ति स्वरूप

सृष्टि प्रादुर्भाव कर्ता पालनकर्ता

संहारणकर्ता प्रकति स्वरूपा उसे उसके परम सत्य को

परम सत्य

  • बुद्धि विवेक ज्ञान अनुभव अनुभूति से
  • परम सत्य रुप से निश्च्छल, निष्कपट, निष्कामी, निरहंकारी होकर बनकर उसका अकलन करके, उसकी गतिविधियों का परम सत्य आकलन करके
  • उसके प्रकृति स्वरूप समस्त अनुदानों का आकलन करके उसे परम सत्य रूप से परम सत्य रूप में पहचानने की कोशिश करो
  • परम सत्य ध्यान से ज्ञान से सत्व सात्विकीय बुद्धि विवेक से पहचानने का प्रयत्न करो
  • वह अपनी सृजनीय संतानों से कोई भी किसी भी किसिम की चाहत,कुछ भी पाने की इच्छा रखने वाला जीवन से जुड़े कार्य व्यापारों को करने वाला अंश मात्र भी नहीं है।
  • उसी भांति जैसे इस सृष्टि पटल पर एक पिता अपने पुत्र से कहीं कुछ भी सही व सत्य मायने से देखा जाए परखा जाए तो उसे देने बनाने सम्हालने  सुधारने, उसका सदैव जीवन के अंतिम क्षणों तक कोई भी आशा अपेक्षा सत्य रूप में, सत्य रूप से अंश मात्र भी न करता हुआ मात्र उसका कल्याण मंगल सदैव भी चाहता है और जो भी शक्ति सामर्थ संपन्नता अपनी संतानों के लिए छोड़ता हुआ रहता है।
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