धरातल पर अज्ञानता, अंधकारता, कुबुद्धिता , दुर्बुद्धिता अवश्य ही विद्यमान है
■गलत का असत्य का विरोध परम सत्य आवश्यक है।
रिपोर्ट: डा० बनवारीलाल पीपर “शास्त्री”
किसी व्यक्ति की मद मे डूबा इंसान पागल समान जैसे हाई बी पी इत्यादि दुविधाओं में फंसा हुआ होता है व बुराई सुनने मात्र से उसमें दुविधापूर्ण लक्षण देखने लगते हैं जिसका खामयाजा उसके परिवार को भी भुगतना पड़ता है। प्रकृति भी उसका मजाक बना कर रखती है
गलत, असत्य का विरोध प्रत्येक परम सत्य पूर्ण सत्य बुद्धिमान, धैर्यशीलता का परिचय विवेकवान, ज्ञानवान , अनुभव व अनुभूतिवान व्यक्ति को साहसी, सर्वहितभावी को आवश्य करना चाहिए।
ऐसा पहलवान व्यक्ति उसे अनदेखा करके उसके पागलपन पर तरस खाता है
वही सृष्टि के धरातल पर अज्ञानता, अंधकारता, कुबुद्धिता , दुर्बुद्धिता अवश्य ही विद्यमान है।
तभी तो अन्यायी,अत्याचारी, छल छद्मीय, झूठ पाखण्डीय रुपस्वरूप धारी निज सुखस्वार्थ में डूबे भाई-भाई की हत्या, मर्डर संसारी समाजीय जन संसार,समाज, घर परिवारीय निज जनों की लूट खसोट अन्याय – अत्याचार, पारस्परिक बे-ईमानीय, झंझट-झगड़े, बलात्कार, धन दोहन, शारीरिक-मानसिक शोषण अपने अत्मिक भाइयों का माताओं, बहिनों, बेटियों, माता पिता, भाई-बहिन, पति-पत्नी का पारस्परिक अज्ञानीय – अंधकारीय रूपो स्वरूपों के राग मे रंगे हुये है। और उसका भयंकर परिणाम भोगने को भी तैयार तो होना ही पड़ता है। प्रगति हिसाब अवश्य पूरा करती है।





