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आत्म नियंत्रण मनो सोच में और चारित्रिक स्वरूप में गिरावट और व्यवहार सत्य हानि लाभ के रुप

रिपोर्ट: डा० बनवारी लाल पीपर “शास्त्री”

“सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया, सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मां कश्चित् दुःख भागभवेत् ॥”

वर्तमान राष्ट्र में सत्ता आसीन शासन, सर्व विनाशक का पासपोर्ट, अराजकता, लूट, रिश्वतखोरी और अन्यायी के रूप में अलग-अलग हैं। परम सत्य अनुदेश ?

वर्तमान भारत की जनगणना में लगातार वृद्धि हो रही है। मेरे समूह से जनसंख्या में वृद्धि हुई है भारत की युवा पीढ़ी, बाल पीढ़ी और प्रौध पीढ़ी वह नर – नारी, स्त्री-पुरुष हो, अवयस्क छात्र समूह और युवा (जवान) सभी वाद्य जोड़े आज 4G मोबाइल आनुपातिक दृष्टि से 90% चला रहे वे अपनी पोर्न साइटें ओपन सेक्स आम विश्लेषण चित्रों के रूप में प्रत्यक्ष दृश्य हो रही हैं। जो हर पल हर क्षण लोगों को उपलब्ध कराता है उनका ध्यान, ज्ञान, जीवन निश्चित रूप से प्रभावित हो रहा है। मूलतः भारत में जनसंख्या वृद्धि का एक मुख्य कारण यह भी हो सकता है।

आत्म संयम की कमी, आत्म मनो नियंत्रण सोच में और चारित्रिक स्वरूप में गिरावट और व्यवहार, बलात्कार राष्ट्रों में बढ़ने वाले जो दृष्टिगोचर हो रहे हैं। इनमें से अधिकांश भूमिका निश्चित रूप से पोर्न साइट्स की भी है। बहुसंख्यक जनसंख्या देश को समाज से गरीबी की ओर ले जाती है। जो आज वर्तमान और भविष्य में सही पूर्ण परम सत्य जीवन राष्ट्र और जनता के लिए सही पूर्ण विकास पूर्ण जीवन राष्ट्र और प्रदेश में लोगों को सही विकास प्रदान करता है।

जब तक देश का प्रदेश का जनमानस ऐसी वैदिक परिभाषा में स्वयं ही अपना आत्म संयम, आत्म नियंत्रण का पूर्ण परम सत्य परिचय न दे।

प्रतिशत वृद्धि में सावधान सलाहकार और अपने सत्य होशो हवाश में अपना घरेलू जीवन परम सत्य रूप से संचालित करें। शासनसत्ता द्वारा दिए गए श्लोकों को सत्यता से पूर्ण किया जा सकता है। शासन को इन अश्लील चारित्रिक गिरावट और असंयमित विचित्र जीवन बनाने वाली पोर्न साइट पर परम सत्य के रूप में प्रतिबंध लगाना चाहिए व प्रतिबंधित करना चाहिए। जिस पर शासन सत्ता ने अपने दिए गए सहयोगियों पर खरी उतराई। समाजजनों का पूर्ण परम सत्य विश्वास पा सके।

देश के मानचित्रण के लिए सही रूप से संपत्ति नहीं, रोजगार नहीं, आहार भोजन तो हर एक के लिए परम सत्य की आवश्यकता है। ऐसे में लूट-खसोट, अराजकता, रिश्वतखोरी और अन्यायी – अत्याचारी स्वरूप के राष्ट्रों में साउदी पैदा होते हैं। जो दस्तावेज़ का और दंगा फ़सादिया अन्याय अत्याचारी राक्षस का जन्मस्थान हैं। अत: इससे राष्ट्र और राष्ट्र के जनमानस को सुख शांति मिलती है और न ही जी पाता है।

राष्ट्रीय प्रदेशीय शासन सत्ता और भारत में रहने वाले जनमानस का अनुपात ही परम सत्य कर्तव्य और दायित्व है। कि वे अपने-अपने कर्तव्य दायित्वों को पूर्ण परम सत्य के रूप से पहचानें, जानें, स्वामित्व और स्वामित्व, सर्वजनहित, राष्ट्र शासन हित परिचय और चतुर्थांश सहयोगी स्वरूप से सत्य खींचें।

तभी देश का विकास, भारत के जन मानस का विकास, सच्चा सुख, शांति, परम आनंद और रामराज्य की सत्य स्थिति बन सकती है। दृष्टिगोचर हो सकता है।

“सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया, सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मां कश्चित् दुःख भागभवेत् ॥”

सभी सुखी हों, सभी निरोगी हों, किसी को किसी प्रकार का कष्ट न हो। सभी एक दूसरे के हिट प्लॉट के लिए।

हे परम आत्मा  “असतो मा सद्गमय, तमसो मा ज्योतिर्गमय, मृत्यो माअमृतगमय ॥”

हे भगवान, हे भगवान, हे भगवान, हे भगवान मुझे असत्य से सत्य की ओर ले चलो। अंधेरे से प्रकाश की ओर ले चलो। मृत्यु से तत्व अमृत की ओर ले चलो।

– डा० बनबारी लाल पीपर “शास्त्री”

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