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न कोचिंग, न दूसरा मौका… 22 साल में IFS बनीं मुस्कान जिंदल, पहली कोशिश में ही रच दिया इतिहास

सोलन (हिमाचल प्रदेश)। आज के दौर में जहां यूपीएससी की तैयारी कोचिंग, टेस्ट सीरीज़ और सालों की मेहनत से जोड़ा जाता है, वहीं हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले की मुस्कान जिंदल ने इस सोच को पूरी तरह बदल दिया। बिना किसी महंगी कोचिंग, बिना डबल अटेम्प्ट और सिर्फ सेल्फ स्टडी के दम पर मुस्कान ने पहले ही प्रयास में यूपीएससी क्रैक कर IFS अधिकारी बनकर देशभर के युवाओं के लिए मिसाल कायम कर दी।
22 साल की उम्र में बड़ी कामयाबी
महज 22 साल की उम्र में मुस्कान जिंदल ने वह कर दिखाया, जिसका सपना लाखों युवा देखते हैं। साल 2019 की यूपीएससी परीक्षा में 87वीं रैंक हासिल कर उन्होंने भारतीय विदेश सेवा (IFS) में जगह बनाई।
बद्दी की बेटी, बड़ी उड़ान
मुस्कान हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले के नगर परिषद बद्दी, हाउसिंग बोर्ड फेस-2 की रहने वाली हैं।
उनके पिता व्यवसायी हैं, जबकि माता गृहिणी हैं। परिवार में दो बहनें हैं। साधारण पारिवारिक माहौल में पली-बढ़ी मुस्कान ने असाधारण लक्ष्य तय किया और उसे हासिल भी किया।
शुरुआत से ही टॉपर
मुस्कान ने बद्दी के एक निजी स्कूल से 12वीं तक की पढ़ाई की और बोर्ड परीक्षा में 96.4 प्रतिशत अंक हासिल कर स्कूल टॉप किया। पढ़ाई में उनकी यह निरंतरता आगे चलकर यूपीएससी की सफलता की मजबूत नींव बनी।
घर से ही शुरू की UPSC की तैयारी
12वीं के बाद मुस्कान ने चंडीगढ़ के एसडी कॉलेज से बीकॉम ऑनर्स किया। ग्रेजुएशन के साथ-साथ उन्होंने घर पर ही यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी।
रोजाना 4 से 5 घंटे की नियमित पढ़ाई, सीमित संसाधन और मजबूत आत्मविश्वास—यही उनकी तैयारी की असली ताकत थी।
ग्रेजुएशन के बाद उम्र कम होने के कारण उन्होंने एक साल का ब्रेक लिया और फिर पूरे आत्मविश्वास के साथ यूपीएससी परीक्षा के लिए आवेदन किया।
बचपन का सपना हुआ सच
सिविल सेवा में जाने का सपना मुस्कान ने बचपन में ही देख लिया था। सही समय, सही योजना और अनुशासन के साथ उन्होंने अपने सपने को हकीकत में बदल दिया।
मुस्कान जिंदल के सक्सेस मंत्र
IFS मुस्कान जिंदल मानती हैं कि—
सेल्फ कंट्रोल सबसे बड़ी ताकत है
ऑनलाइन स्टडी रिसोर्सेज का सही इस्तेमाल करें
अपने अनुसार स्टडी टाइम-टेबल बनाएं
मानसिक संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी
एक समय में एक ही लक्ष्य पर फोकस करें
युवाओं के लिए संदेश
मुस्कान जिंदल की कहानी यह साबित करती है कि
सफलता कोचिंग की मोहताज नहीं होती, बल्कि आत्मविश्वास, अनुशासन और निरंतर मेहनत से मिलती है

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