लेखपाल से आईएएस तक: नाथद्वारा की बेटी पूजा कुमावत बनीं युवाओं के लिए प्रेरणा
रिपोर्ट: विनय कुमार
नाथद्वारा/राजसमंद। राजस्थान के राजसमंद जिले के धार्मिक नगर नाथद्वारा की बेटी पूजा कुमावत आज हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं।
सीमित संसाधनों और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच उन्होंने न केवल सरकारी नौकरी हासिल की, बल्कि उसी के साथ कठिन आईएएस (UPSC) परीक्षा की तैयारी कर सफलता भी प्राप्त की। उनका संघर्ष और सफलता यह साबित करती है कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत सच्ची हो, तो कोई भी बाधा रास्ता नहीं रोक सकती।
बचपन से था बड़ा सपना
पूजा कुमावत का जन्म नाथद्वारा क्षेत्र के एक सामान्य परिवार में हुआ। बचपन से ही वे पढ़ाई में तेज और अनुशासित छात्रा रहीं। स्कूल के दिनों से ही उनके मन में समाज के लिए कुछ बड़ा करने का सपना था।
कॉलेज की पढ़ाई के दौरान उन्होंने यह लक्ष्य तय कर लिया था कि उन्हें प्रशासनिक सेवा में जाकर समाज और देश के लिए काम करना है।
हालांकि परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत नहीं थी, लेकिन कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी और अपने लक्ष्य से कभी समझौता नहीं किया।
सरकारी नौकरी से मिला परिवार को सहारा
पढ़ाई पूरी करने के बाद पूजा कुमावत ने सरकारी सेवा में लेखपाल (या समकक्ष प्रशासनिक पद) के रूप में नौकरी प्राप्त की। यह उनके जीवन का महत्वपूर्ण मोड़ था, क्योंकि इससे परिवार को आर्थिक सहारा मिला।
लेकिन उनके मन में अभी भी एक बड़ा सपना बाकी था — आईएएस अधिकारी बनने का। इसलिए उन्होंने नौकरी के साथ-साथ संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी।
दिन में नौकरी, रात में पढ़ाई
पूजा कुमावत की दिनचर्या बेहद कठिन रही।
दिनभर सरकारी कामकाज और शाम होते ही किताबों के साथ अध्ययन।
कई बार देर रात तक पढ़ाई करना उनकी आदत बन गई थी। सीमित समय में पढ़ाई के लिए उन्होंने अनुशासन और समय प्रबंधन को अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाया।
सेल्फ स्टडी से की तैयारी
पूजा कुमावत ने अपनी तैयारी के लिए एक सुसंगठित रणनीति बनाई। उनका मानना था कि UPSC की तैयारी में तीन चीजें सबसे ज्यादा जरूरी होती हैं—
सही अध्ययन सामग्री
नियमित अभ्यास
धैर्य और अनुशासन
उन्होंने NCERT की पुस्तकों, समसामयिक घटनाओं और अखबारों को अपनी तैयारी का आधार बनाया। साथ ही नियमित रूप से मॉक टेस्ट देकर अपनी तैयारी को मजबूत किया।
खास बात यह रही कि उन्होंने किसी बड़े कोचिंग संस्थान का सहारा नहीं लिया, बल्कि सेल्फ स्टडी और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से तैयारी की और अपनी रणनीति को और बेहतर बनाया।
आखिरकार मिली बड़ी सफलता
लगातार मेहनत, धैर्य और आत्मविश्वास के बल पर आखिरकार वह दिन आया जब पूजा कुमावत ने UPSC सिविल सेवा परीक्षा में सफलता हासिल कर ली।
उनकी इस उपलब्धि से न केवल उनका परिवार बल्कि पूरा नाथद्वारा क्षेत्र गर्व महसूस कर रहा है।
मां से मिला सबसे बड़ा हौसला
पूजा कुमावत अपनी सफलता का श्रेय अपनी मां और परिवार को देती हैं। उनका कहना है कि कठिन समय में मां ने हमेशा उन्हें हिम्मत दी और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
युवाओं के लिए संदेश
पूजा कुमावत का कहना है—
“सफलता एक दिन में नहीं मिलती। इसके लिए लगातार मेहनत, धैर्य और खुद पर विश्वास जरूरी होता है। अगर आप अपने लक्ष्य के लिए ईमानदारी से प्रयास करते हैं, तो एक दिन सफलता जरूर मिलती है।”
यूपीएससी 2025 का परिणाम भी जारी
इस बीच UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 का फाइनल रिजल्ट भी जारी हो चुका है। उम्मीदवार upsc.gov.in पर जाकर रिजल्ट सेक्शन में पीडीएफ डाउनलोड कर CTRL+F के जरिए अपना नाम चेक कर सकते हैं।
इस वर्ष परीक्षा में अनुज अग्निहोत्री ने पहला स्थान हासिल किया है, जबकि राजेश्वरी सुवे एम दूसरे स्थान पर रही हैं।
UPSC 2025 के टॉप 10 टॉपर्स
अनुज अग्निहोत्री
राजेश्वरी सुवे एम
अकांश ढुल
राघव झुंझुनवाला
ईशान भटनागर
जिन्निया ऑरोरा
ए आर राजा मोहिदीन
पक्षल सेक्रेटरी
आस्था जैन
उज्ज्वल प्रियंक
प्रेरणा बनी पूजा कुमावत
पूजा कुमावत की कहानी यह साबित करती है कि साधारण परिवार की बेटियाँ भी असाधारण सफलता प्राप्त कर सकती हैं।
उनका संघर्ष और सफलता हर उस युवा के लिए प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखने का साहस रखता है।






