रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, झांसी में 14 से 16 फरवरी तक तीन दिवसीय ‘किसान मेला एवं कृषि प्रदर्शनी’ का हुआ भव्य शुभारंभ

■ किसान मेला व कृषि प्रदर्शनी कृषि प्रदर्शनी का फीता काटकर शुभारंभ किया उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने
रिपोँट : विनय पचौरी
रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, झांसी में 14 से 16 फरवरी तक तीन दिवसीय ‘किसान मेला एवं कृषि प्रदर्शनी’ का आयोजन किया गया।

इसका शुभारंभ उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने किया। इस कार्यक्रम में किसानों को नवीनतम कृषि तकनीकों और जलवायु-समावेशी कृषि प्रणालियों के बारे में जानकारी प्रदान की गई।

इसके अलावा, इक्रिसैट, हैदराबाद द्वारा आयोजित 21 दिवसीय अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत 14 देशों के 23 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने विश्वविद्यालय का शैक्षणिक भ्रमण किया।
इस दौरान, माननीय कुलपति डॉ. अशोक कुमार सिंह ने प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया और उन्हें विश्वविद्यालय की गतिविधियों से अवगत कराया।

डॉ एसके सिंह शिक्षा निदेशक रानी लक्ष्मी बाई केंद्रीय विश्वविद्यालय झांसी ने कार्यक्रम में आए हुए सभी अतिथियों उत्तर प्रदेश शासन से आए कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही व सदर विधायक झांसी रवि शर्मा मऊरानीपुर विधायिका रश्मि आर्या, श्री श्याम बिहारी गुप्ता प्रदेश अध्यक्ष गौ सेवा प्रमुख , विधायिका रमा निरंजन माननीय कुलपति डॉक्टर अशोक कुमार सिंह डॉ पी के सिंह कृषि आयुक्त अनुसंधान व सेक्रेटरी भारत सरकार नई दिल्ली डॉ एस के सिंह निदेशक प्रसार ,डॉ एस के चतुर्वेदी निदेशक शोध का परिचय सभी किसान भाईयों को कराया गया

इस प्रकार, रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय में आयोजित कार्यक्रमों ने किसानों और अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडलों को उन्नत कृषि तकनीकों और जलवायु-समावेशी प्रणालियों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की।

रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, झांसी में 14 से 16 फरवरी 2025 तक आयोजित तीन दिवसीय ‘किसान मेला एवं कृषि प्रदर्शनी’ का मुख्य विषय “जलवायु समावेशी कृषि प्रणाली” था।
इस आयोजन का उद्देश्य किसानों को जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के प्रति जागरूक करना और उन्हें अनुकूलन की तकनीकों से अवगत कराना था।
तकनीकी सत्र: मेले के दौरान जलवायु-समावेशी कृषि, प्राकृतिक खेती, श्री अन्न, पशुपालन, और मत्स्य पालन जैसे विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा तकनीकी सत्र आयोजित किए गए।
इन सत्रों में वैज्ञानिकों ने जलवायु परिवर्तन के प्रभावों, जल संरक्षण, और अनुकूलन तकनीकों पर अपने अनुभव साझा किए।
प्रदर्शनी: कृषि से संबंधित विभिन्न तकनीकों, यंत्रों, और नवीनतम उपकरणों का सजीव प्रदर्शन किया गया। इसमें संरक्षित खेती, एकीकृत कृषि प्रणाली, फसल कैफेटेरिया, मधुमक्खी पालन, और आधुनिक कृषि यंत्रों के जीवंत मॉडल शामिल थे।
स्टॉल्स: भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के 14 संस्थान, 6 कृषि विश्वविद्यालय, 50 निजी कंपनियाँ, एफपीओ, और स्वयं सहायता समूहों ने अपने स्टॉल लगाए।
इन स्टॉल्स के माध्यम से किसानों को नवीनतम कृषि तकनीकों, उत्पादों, और सेवाओं की जानकारी प्रदान की गई।
प्रक्षेत्र भ्रमण: किसानों के लिए विश्वविद्यालय प्रक्षेत्र में संरक्षित खेती, एकीकृत कृषि प्रणाली, और आधुनिक कृषि यंत्रों के प्रदर्शन के लिए भ्रमण का आयोजन किया गया, जिससे वे इन तकनीकों को प्रत्यक्ष रूप से समझ सकें।
इस मेले में उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के लगभग 15,000 किसानों ने भाग लिया।
कुलपति डॉ. अशोक कुमार सिंह ने बताया कि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक बुंदेलखंड क्षेत्र की जलवायु के अनुसार फसलों को विकसित करने में सक्रिय रूप से कार्यरत हैं और किसानों को उनके खेतों पर तकनीकी सहायता और उन्नत बीज प्रदान कर रहे हैं।
इस प्रकार, ‘किसान मेला एवं कृषि प्रदर्शनी’ ने किसानों को जलवायु परिवर्तन के प्रति जागरूक करने और उन्हें अनुकूलन की तकनीकों से सुसज्जित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

अधिक जानकारी के लिए, आप रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के आधिकारिक पेज पर भी जा सकते हैं, जहां कार्यक्रम से संबंधित अपडेट्स उपलब्ध हो सकते हैं।
यदि आप कार्यक्रम संबोधन का विस्तृत विवरण चाहते हैं, तो संबंधित समाचार स्रोत focusnews24x7 पर या विश्वविद्यालय के आधिकारिक पेज से संपर्क करना उचित होगा।
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