भरत तिवारी एनकाउंटर पर बवाल! BJP नेताओं ने भी उठाए सवाल
भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र में हुए भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले ने अब पूरे बिहार में राजनीतिक और सामाजिक बहस छेड़ दी है। भरत भूषण तिवारी की मौत के बाद आरा शहर से लेकर गांव-गांव और सोशल मीडिया तक इस घटना की चर्चा हो रही है। परिजन, ग्रामीण और आम लोग मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।
परिजनों का आरोप है कि भरत भूषण तिवारी का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था और उन्हें फर्जी एनकाउंटर में मार गिराया गया। वहीं पुलिस का दावा है कि कार्रवाई परिस्थितियों के अनुसार की गई। इसी विरोधाभास ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मामले ने अब राजनीतिक रंग भी ले लिया है। बिहार सरकार के कई मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने भी एनकाउंटर की परिस्थितियों पर सवाल उठाए हैं। शिक्षामंत्री मिथिलेश तिवारी ने पूछा है कि क्या आरोपी को जीवित पकड़ने की कोशिश की जा सकती थी। वहीं उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने भी पूरे घटनाक्रम पर चिंता जताते हुए विस्तृत जांच की आवश्यकता बताई है।
बक्सर विधायक और पूर्व आईपीएस अधिकारी आनंद मिश्रा ने भी एनकाउंटर में मानक प्रक्रिया यानी एसओपी के पालन को लेकर सवाल खड़े किए हैं। स्थानीय विधायकों और जनप्रतिनिधियों ने भी मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
इधर भरत भूषण तिवारी के गांव में नेताओं और सामाजिक संगठनों का लगातार आना-जाना बना हुआ है। विपक्षी नेताओं ने भी परिजनों से मुलाकात कर न्याय दिलाने का भरोसा दिया है। परिजनों का कहना है कि चार पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई पर्याप्त नहीं है, बल्कि पूरे मामले की निष्पक्ष और व्यापक जांच होनी चाहिए।
फिलहाल राज्य सरकार पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है। अब सबकी निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। क्या पुलिस की कार्रवाई सही साबित होगी या परिजनों के आरोपों को बल मिलेगा, इसका फैसला जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
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