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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का तुलसीदास जन्मभूमि राजापुर चित्रकूट में ऐतिहासिक दौरा
■ राजापुर की भूमि पर बोले मोरारी बापू जहाँ तुलसी हैं, वहीं सच्चे राम हैं।
राजापुर, चित्रकूट — आज तुलसीदास जी की जन्मभूमि राजापुर में एक ऐतिहासिक क्षण दर्ज हुआ जब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जगद्गुरु राम भद्राचार्य जी महाराज और राम अनुजाचार्य जी के सान्निध्य में इस पावन स्थल का दौरा किया।
यह कार्यक्रम न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक रहा, बल्कि संस्कृति और संत संवाद का एक प्रेरणादायक उदाहरण भी बना।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सबसे पहले तुलसी जन्मभूमि स्थल पर दर्शन कर गोस्वामी तुलसीदास जी को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने परिसर में चल रहे निर्माण कार्यों, संरक्षण प्रयासों और तीर्थ विकास की योजनाओं का जायजा लिया।
मुख्यमंत्री ने कहा: तुलसीदास जी ने रामचरितमानस के माध्यम से भारत को एक सूत्र में बाँधा है। उनका जीवन, उनके विचार आज भी हमारे मार्गदर्शक हैं। हम इस स्थल को विश्वस्तरीय तीर्थ बनाना चाहते हैं।
इस दौरान जगद्गुरु राम भद्राचार्य जी ने अपने संबोधन में कहा:
योगी जी का आगमन यहां केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि आध्यात्मिक भाव से भरा हुआ है। उनका प्रयास है कि यह जन्मभूमि संपूर्ण भारत की आस्था का केंद्र बने।
राम अनुजाचार्य जी ने भी अपने वक्तव्य में संत परंपरा, रामभक्ति और सरकार की तीर्थस्थलों के लिए योजनाओं की सराहना की।
विशेष साक्षात्कार में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बताया:
अयोध्या और चित्रकूट की सांस्कृतिक कड़ी को और मजबूत किया जाएगा।
राजापुर को ‘रामायण सर्किट’ में प्रमुख रूप से शामिल किया जाएगा।
संतों और श्रद्धालुओं के लिए आवश्यक सुविधाओं का विकास किया जाएगा।
कार्यक्रम में अन्य मुख्य आकर्षण:
स्थानीय स्कूलों के बच्चों ने रामकथा और तुलसीदास जी की चौपाइयों का गायन किया।
भव्य संत सम्मेलन और आरती का आयोजन हुआ।
CM ने तुलसी साहित्य से जुड़ी प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया।
मुख्यमंत्री का यह दौरा केवल राजनीतिक दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पुनर्जागरण का संदेश भी देता है। राम भक्ति, तुलसी परंपरा और संतों के मार्गदर्शन में यह स्थल अब भारत का एक नया सांस्कृतिक केंद्र बनने की ओर अग्रसर है।
CM योगी का तुलसी जन्मभूमि पर दौरा – रामभक्ति का महाकुंभ
जब राजापुर में मिले रामभक्त मुख्यमंत्री और संत – जानिए क्या कहा योगी आदित्यनाथ ने तुलसीदास जन्मभूमि पर
राजापुर में मुरारजी बापू जी का भावुक संबोधन – तुलसी का जीवन भारत की आत्मा है”
चित्रकूट, राजापुर — तुलसीदास जी की जन्मभूमि पर आयोजित तुलसी जन्मोत्सव में पहुंचे प्रसिद्ध कथा वाचक और संत प्रवक्ता मुरारजी बापू ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए एक अत्यंत भावनात्मक और आध्यात्मिक संदेश दिया।
मोरारी बापू जी ने कहा जहाँ तुलसी का जन्म हुआ, वहाँ रामचरितमानस का हर अक्षर साँस लेता है। राजापुर केवल एक गांव नहीं, यह वह भूमि है जहाँ से राम नाम की गूंज पूरे भारत में फैली। तुलसीदास जी का जीवन, उनकी भक्ति, उनकी कलम — यह सब भारत की आत्मा का परिचय हैं।
उन्होंने विशेष रूप से रामभक्ति, संस्कार और संत परंपरा पर जोर देते हुए कहा राम को केवल मंदिरों में नहीं, हृदय में बसाइए। तुलसी ने हमें सिखाया कि राम केवल राजा नहीं, मर्यादा हैं।
मुख्य बातें मोरारी जी बापू के वक्तव्य की
राजापुर को रामायण परंपरा का तीर्थ स्थल बताया।
तुलसीदास जी की लेखनी को युगों तक प्रासंगिक बताया।
युवा पीढ़ी से तुलसी साहित्य को पढ़ने और अपनाने की अपील की।
उन्होंने सरकार से इस भूमि के संरक्षण और विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का आग्रह किया।
कार्यक्रम में श्रद्धालु भावविभोर हो गए जब बापू जी ने रामचरितमानस की चौपाइयों का उच्चारण किया।
राजापुर की भूमि पर बोले मोरारी बापू – जहाँ तुलसी हैं, वहीं सच्चे राम हैं।”
वही राजापुर से साध्वी मिथिलेश्वरी का बड़ा बयान – रामायण के मान से ही भारत की पहचान
चित्रकूट, राजापुर – गोसाईं तुलसीदास जी की जन्मभूमि पर आयोजित हुए भव्य तुलसी जन्मोत्सव में जानी-मानी मानस कोकिला साध्वी मिथिलेश्वरी दीक्षित जी ने उपस्थित श्रद्धालुओं को रामकथा और संस्कृति का महत्व समझाते हुए भावविभोर कर दिया।
साध्वी जी ने अपने उद्बोधन में कहा रामायण भारत की आत्मा है। राम कथा केवल कथा नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला है। तुलसीदास जी ने भारत को भाषा, भक्ति और भावना से जोड़ा है। अगर भारत को जानना है, तो राम को समझना होगा, और राम को समझना है तो तुलसीदास को पढ़ना होगा।”
उन्होंने तुलसी साहित्य की महत्ता को रेखांकित करते हुए कहा कि:
राजापुर जैसे तीर्थस्थल केवल ईंट और पत्थर नहीं, भाव और भक्ति के प्रतीक हैं। यहां आकर लगता है जैसे रामचरितमानस जीवंत हो उठी हो।”
साथ ही साध्वी जी ने रामचरितमानस को राष्ट्रीय चेतना का स्तंभ बताया।
उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे भक्ति को सिर्फ परंपरा न मानें, बल्कि उसे आचरण में उतारें।
तुलसी साहित्य को शिक्षा व्यवस्था में सम्मिलित करने की बात कही।
कार्यक्रम के अंत में उन्होंने तुलसी जन्मभूमि के विकास हेतु सरकार और समाज से सहयोग की अपील भी की।
आगे कहा चित्रकूट की राम भूमि से साध्वी मिथिलेश्वरी ने कि रामायण से ही भारत महान, तुलसी से ही हिंदुस्तान की पहचान!”
साध्वी मिथिलेश्वरी का बड़ा बयान तुलसी नहीं तो भारत नहीं!






