आंखें खोलो अपने आत्मघाती आत्मशरीर विनाशी तथा परिवार व बच्चों के विनाश का कारण मत बनो
रिपोर्ट: डा० बनवारी लाल पीपर “शास्त्री”
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उठो जागो बर्बाद व बर्बादी करने वाले व्यवसनों से अपने को पूूर्णतया मुक्त करो ।
बीड़ी, सिगरेट, गांजा, भांग, स्मैक, चरस, शराब, गुटका, मसाला ये विष से भी भयंकर हैं । विष तो दो चार घंटे में मार देता है परन्तु ये व्यवसन तन मन धन सबका हरण करके घर परिवार व बच्चों का जीवन तो बर्बाद करते ही हैं साथ में इस्तेमाल करने वाले को तिल-तिल गलाकर शनै शनै बेमौत मरने को मजबूर कर देते हैं। आंखें खोलो अपने आत्मघाती आत्मशरीर विनाशी तथा परिवार व बच्चों के विनाशकार मत बनो।
प्रिय आत्मिक भाइयों सर्व प्रथम आत्म विकास अपने को ही सभी दोषों दुर्गुणों व्यवसनों से बचाने में ही है। इनसे दूर रखने में ही है। अर्थात्
पहला ज्ञान प्रकाश स्वयं में स्वयं से सच्ची उन्नति करने का पहला कदम है।
जो मात्र तुम्हारी ही अपनी आत्म जागृति से शुरू होता है । जागो । तुम्हारे आगामी जीवन भविष्य का शारीरिक मानसिक आर्थिक विकास का स्वरूप इन्हीं दोष दुर्गुणों (व्यवसनों) को त्यागने / ग्रहण करने पर ही आधारित है I त्यागोगे अग्रगामी उन्नतिशील बनोगे। ग्रहण करने पर आत्म विनाशी, परिवार विनाशी बनोगे I देखोगे I भोगोगे । उन्नति । पतन तुम्हारे अपने स्वयं के ही हाथ में है। सोचो ? सद्मार्ग की ओर बढ़ो। असद् मार्ग को छोड़ो | आत्म मंगल परिवार मंगल।
आत्म आनन्द (खुशी) परिवार आनन्द (खुशी) के तुम ही निर्माता हो।
अगर तुमने शरीर मन इन्द्रियों को जीत लिया अर्थात् अपने वश में करके चलाया तो तुम्हें संसार कहीं कोई दुःख या कष्ट देने वाला कोई नहीं है और न ही दे सकता है। हम स्वयं ही अपने सुख दुःख के सर्व प्रथम कारण अथवा सम्पूर्ण निर्माता हैं।
- कोऊ न काहू को सुख दुःख कर दाता ।
निज कृत कर्म भोग सब भ्राता ॥
- कर्म प्रधान विश्व रचि राखा ।
जो जस करै सो तस फल चाखा ॥
उठो जागो बर्बाद व बर्बादी करने वाले व्यवसनों से अपने को पूूर्णतया मुक्त करो । – डा० बनवारी लाल पीपर “शास्त्री”






