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मोठ-समथर बाईपास निर्माण पर किसानों में आक्रोश, लेकिन सड़क बनने से लोगों को मिलेगी राहत

झांसी जनपद के मोठ-समथर थाना क्षेत्र में निर्माणाधीन बाईपास सड़क को लेकर किसानों और निर्माण एजेंसी के बीच विवाद गहराता जा रहा है। एक ओर जहां किसान अपनी उपजाऊ जमीनों से बिना अनुमति मिट्टी उठाए जाने का आरोप लगाकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर क्षेत्र के कई ग्रामीण और राहगीर मानते हैं कि वर्षों से लंबित यह सड़क बनने के बाद आने-जाने में बड़ी राहत मिलेगी और क्षेत्र का विकास भी तेज होगा।

कुछ दिन पहले गरौठा विधायक जवाहरलाल राजपूत द्वारा पहाड़पुरा पुल से संजोखरी होते हुए समथर दबोह तिराहे तक बनने वाली बाईपास सड़क का भूमि पूजन एवं उद्घाटन किया गया था। लगभग 9 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली यह सड़क क्षेत्र को बेहतर यातायात सुविधा देने के उद्देश्य से तैयार की जा रही है। सड़क निर्माण शुरू होते ही लोगों में उम्मीद जगी थी कि अब जाम, खराब रास्तों और लंबी दूरी की समस्या से राहत मिलेगी।

लेकिन इसी बीच किसानों ने आरोप लगाया कि सड़क निर्माण के लिए रातों-रात उनके खेतों से बिना अनुमति मिट्टी उठाई गई। बुधवार सुबह जब किसान अपने खेतों पर पहुंचे तो कई जगह गहरे गड्ढे और मिट्टी खुदी मिली। किसानों का कहना है कि उनकी उपजाऊ जमीनों को नुकसान पहुंचाया गया है और उन्हें न तो कोई सूचना दी गई और न ही मुआवजे को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी दी गई।

आक्रोशित किसानों ने निर्माण स्थल पर पहुंचकर विरोध प्रदर्शन किया और कार्य रुकवाने की मांग की। किसानों का आरोप है कि खेतों के किनारे 10 से 12 फीट गहरी खाइयां खोद दी गई हैं, जिससे हादसे की आशंका बढ़ गई है। उनका कहना है कि यदि कोई पशु या राहगीर वहां से गुजरता है तो बड़ी दुर्घटना हो सकती है। साथ ही खेतों में लगी तार फेंसिंग और लोहे के एंगल गायब होने की भी शिकायत ग्रामीणों ने की है।

हालांकि क्षेत्र के कुछ लोगों का कहना है कि सड़क निर्माण जैसे बड़े कार्यों में मिट्टी की आवश्यकता पड़ती ही है और कई बार ठेकेदार स्थानीय स्तर पर ही मिट्टी की व्यवस्था करते हैं। लोगों का यह भी कहना है कि फिलहाल सड़क बनने से आने-जाने वालों को निश्चित रूप से फायदा मिलेगा, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि मिट्टी आखिर कहां से लाई जाए। अक्सर ऐसे मामलों में अधिकारियों के पास भी स्पष्ट जवाब नहीं होता, जिससे विवाद की स्थिति बन जाती है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि विकास कार्य जरूरी हैं, लेकिन किसानों की जमीन और उनकी मेहनत का सम्मान भी उतना ही आवश्यक है। यदि प्रशासन पहले से किसानों को भरोसे में लेकर उचित अनुमति और मुआवजे की प्रक्रिया पूरी करता तो शायद यह विवाद खड़ा नहीं होता। फिलहाल निर्माण कार्य और किसानों के विरोध के बीच माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है, लेकिन ग्रामीण चाहते हैं कि सड़क का काम भी पूरा हो और किसानों को न्याय भी मिले।

मामले को लेकर लोक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता बृजेश गंगवार से संपर्क किया गया, लेकिन उन्होंने पूरे प्रकरण पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया। घटना के बाद क्षेत्र में प्रशासनिक कार्यशैली को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

मोठ से संवाददाता जहूर अहमद खान की रिपोर्ट

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