उरई-जालौन में ज्ञान का उत्सव: ‘माता प्रसाद पुस्तकालय’ का भव्य लोकार्पण

उरई (जालौन)। बुंदेलखंड की धरती पर ज्ञान, संस्कृति और सामाजिक जागरूकता का एक नया अध्याय उस समय लिखा गया, जब जनपद जालौन के समीप स्थित चमारी गांव में वरिष्ठ पत्रकार सौरभ द्विवेदी द्वारा निर्मित ‘माता प्रसाद पुस्तकालय’ का भव्य लोकार्पण समारोह आयोजित किया गया। देसराग संस्थान के तत्वावधान में आयोजित इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में देश के विभिन्न क्षेत्रों से कई प्रतिष्ठित हस्तियां शामिल हुईं और पुस्तकालय की स्थापना को ग्रामीण भारत में ज्ञान क्रांति की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
कार्यक्रम में शामिल होकर वक्ताओं और अतिथियों ने कहा कि पुस्तकें ज्ञान का भंडार होती हैं और मनुष्य की सबसे सच्ची मित्र होती हैं। पुस्तकें न केवल जीवन की सही दिशा दिखाती हैं बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन का मार्ग भी प्रशस्त करती हैं। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्र में आधुनिक पुस्तकालय की स्थापना युवाओं को नई दिशा देने का कार्य करेगी।
देश की प्रमुख हस्तियों की रही गरिमामयी उपस्थिति
इस अवसर पर राज्यसभा के उपसभापति श्री हरिवंश नारायण सिंह, नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित कैलाश सत्यार्थी, प्रसिद्ध कवि एवं वक्ता डॉ. कुमार विश्वास, वरिष्ठ पत्रकार एवं आयोजक सौरभ द्विवेदी, शिक्षाविद विकास दिव्यकीर्ति, प्रसिद्ध स्टैंड-अप कॉमेडियन और कहानीकार जाकिर खान, सुप्रसिद्ध अभिनेत्री सोनाली बेंद्रे, पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त अशोक लवासा सहित अनेक विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश सरकार के कई जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की भी सहभागिता रही। मंच पर मौजूद अतिथियों ने पुस्तकालय की स्थापना को ग्रामीण युवाओं के लिए शिक्षा, विचार और प्रेरणा का केंद्र बताया।
बुंदेलखंड में ज्ञान की नई पहल
वरिष्ठ पत्रकार सौरभ द्विवेदी ने अपने संबोधन में कहा कि यह पुस्तकालय केवल एक भवन नहीं, बल्कि बुंदेलखंड के युवाओं के सपनों का केंद्र है। लगभग दो करोड़ रुपये की लागत से निर्मित इस पुस्तकालय में देश-विदेश के नामचीन लेखकों की सैकड़ों पुस्तकों का संग्रह रखा गया है, जिससे गांव और आसपास के क्षेत्रों के छात्र-छात्राएं लाभ उठा सकेंगे।
उन्होंने कहा कि उनका सपना बुंदेलखंड के यूपी-एमपी क्षेत्र में 100 से अधिक पुस्तकालय स्थापित करने का है, ताकि ग्रामीण युवाओं को रोजगारपरक शिक्षा, अध्ययन का वातावरण और सामाजिक बदलाव की प्रेरणा मिल सके।
गांव की मिट्टी से जुड़े रहने की मिसाल
सौरभ द्विवेदी का जीवन सफर भी युवाओं के लिए प्रेरणादायी माना जा रहा है। चमारी गांव की पगडंडियों से निकलकर राष्ट्रीय स्तर की पत्रकारिता में पहचान बनाने वाले सौरभ द्विवेदी ने डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म लल्लनटॉप के माध्यम से देश-दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई। इसके बाद उन्होंने नए मुकाम पर पहुंचते हुए हिंदी पत्रकारिता में प्रतिष्ठित ‘इंडियन एक्सप्रेस’ के हिंदी संस्करण के संपादक के रूप में भी कार्यभार संभाला।
आज अपने पैतृक गांव में अपने बाबा माता प्रसाद द्विवेदी की स्मृति में पुस्तकालय बनाकर उन्होंने यह संदेश दिया है कि सफलता के शिखर पर पहुंचने के बाद भी अपनी जड़ों से जुड़े रहना ही सच्ची पहचान है।
युवाओं में दिखा खास उत्साह
पुस्तकालय के उद्घाटन समारोह में आसपास के गांवों और जिलों से बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं, शिक्षक, साहित्य प्रेमी और सामाजिक कार्यकर्ता पहुंचे। पूरे क्षेत्र में इस आयोजन को लेकर उत्साह का माहौल रहा।
वक्ताओं ने कहा कि यह पुस्तकालय आने वाले समय में बुंदेलखंड में शिक्षा, साहित्य और विचार विमर्श का बड़ा केंद्र बनेगा।
समाज के लिए प्रेरक संदेश
समारोह में मौजूद अतिथियों ने एक स्वर में कहा कि आज के समय में जब समाज में ज्ञान और सकारात्मक सोच की आवश्यकता है, तब इस प्रकार की पहल राजनीतिक और सामाजिक नेतृत्व के लिए भी प्रेरणा का कार्य करती है।
‘माता प्रसाद पुस्तकालय’ का लोकार्पण न केवल बुंदेलखंड बल्कि पूरे प्रदेश के लिए एक प्रेरक उदाहरण बन गया है कि यदि संकल्प मजबूत हो तो गांव से भी ज्ञान की ऐसी मशाल जलाई जा सकती है जो पूरे देश को रोशन कर दे।

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