हाईकोर्ट ने दी बड़ी राहत: 32,000 प्राथमिक शिक्षकों की नौकरी बरकरार, रद्दीकरण का आदेश रद्द

रिपोर्ट— विनय कुमार 

पश्चिम बंगाल में लगभग 32 हजार प्राथमिक शिक्षकों के भविष्य पर छाए अनिश्चितता के बादल बुधवार को हट गए। कलकत्ता हाई कोर्ट की खंडपीठ ने सिंगल बेंच के उस विवादित आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें कथित कैश फॉर जॉब्स मामले के चलते सभी नियुक्तियों को अवैध घोषित कर दिया गया था।

नौ साल बाद नौकरी छीनना ‘अविवेकपूर्ण’: खंडपीठ

न्यायमूर्ति तपब्रत चक्रवर्ती की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि रिकॉर्ड देखते हुए यह नहीं कहा जा सकता कि पूरी भर्ती प्रक्रिया ही भ्रष्ट थी। अदालत ने माना कि इतने लंबे समय बाद एक झटके में हज़ारों परिवारों की आजीविका खत्म करना न्यायसंगत नहीं होगा।

पीठ ने टिप्पणी की,
“कुछ मामलों में अनियमितता की आशंका दिखाई देती है, लेकिन पूरे सिस्टम को संदेह की नज़र से देखना उचित नहीं। कुछ असफल अभ्यर्थियों के आरोपों के आधार पर पूरी प्रक्रिया को ढहाने की अनुमति नहीं दी जा सकती।”

सीबीआई रिपोर्ट में सिर्फ सीमित गड़बड़ियां

अदालत के निर्देश पर हुई सीबीआई जांच में केवल 264 नियुक्तियों में गड़बड़ियों का संकेत मिला, जबकि बाद में 96 और शिक्षकों पर प्राथमिक स्तर की जांच की जरूरत बताई गई।
पीठ ने कहा कि सीमित अनियमितताओं की वजह से सभी 32,000 नियुक्तियों को खत्म करना “अत्यधिक कठोर कदम” होगा।

सिंगल बेंच ने बड़े पैमाने पर धांधली मानी थी

पहले आए आदेश में यह माना गया था कि 2014 टीईटी भर्ती में बाहरी एजेंसियों की भूमिका, मेरिट सूची से छेड़छाड़ और कथित रूप से पैसों के लेनदेन जैसे गंभीर आरोप साबित होते हैं।
इसी आधार पर सभी नियुक्तियों को एकसाथ रद्द कर दिया गया था।

सरकार और शिक्षक संगठनों ने राहत की सांस ली

खंडपीठ के फैसले के बाद राज्य सरकार के साथ-साथ उन शिक्षकों में भी खुशी की लहर है, जो पिछले नौ वर्षों से स्कूलों में पढ़ा रहे थे और अचानक नौकरी खोने की आशंका से जूझ रहे थे।
कई संगठनों ने कहा कि अदालत ने “मानवीय पक्ष” को प्रमुखता दी है।

मामले की व्यापक सुनवाई अप्रैल 2025 से

अब भर्ती प्रक्रिया से जुड़ी विस्तृत सुनवाई अप्रैल 2025 से शुरू होगी, जिसमें कोर्ट नियुक्ति प्रक्रिया में पाई गई आंशिक अनियमितताओं पर अंतिम फैसला करेगा।

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