जयपुर के ‘कान्हा ग्रुप’ पर आयकर की मेगा रेड

■ 6 शहरों में 33 ठिकानों पर एक साथ कार्रवाई, 50 लाख कैश और 8 लॉकर मिले

जयपुर। राजस्थान की राजधानी में बुधवार सुबह उस वक्त हड़कंप मच गया जब आयकर विभाग की अन्वेषण शाखा ने मशहूर रेस्टोरेंट चेन कान्हा ग्रुप के 33 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी शुरू कर दी। सुबह करीब 7 बजे टीम ने जयपुर के हिम्मत नगर, टोंक रोड स्थित मुख्य कार्यालय पर दबिश दी और इसके बाद शहर के अलग-अलग इलाकों सहित अन्य शहरों में भी कार्रवाई का दायरा बढ़ा दिया।आयकर विभाग की यह कार्रवाई जयपुर, उदयपुर, कोटा, श्रीगंगानगर, करौली, हिंडौन और मुंबई तक फैली हुई है। जयपुर में सबसे अधिक 26 स्थानों पर रेड डाली गई, जबकि उदयपुर में 2 और अन्य शहरों में एक-एक ठिकाने पर कार्रवाई जारी है।
करोड़ों की टैक्स चोरी के सुराग
सूत्रों के मुताबिक, आयकर विभाग को लंबे समय से ग्रुप द्वारा बड़े पैमाने पर कैश ट्रांजेक्शन और वित्तीय अनियमितताओं की सूचना मिल रही थी। प्रारंभिक जांच में 100 करोड़ रुपये से अधिक की संभावित टैक्स चोरी के संकेत मिले हैं। अब तक 50 लाख रुपये नकद और 8 बैंक लॉकर की जानकारी सामने आई है।
जांच में यह भी सामने आया है कि कथित रूप से बचाए गए टैक्स के पैसों को लग्जरी होटलों और अन्य बड़े निवेश में लगाया गया। इसी क्रम में आमेर रोड स्थित एक पांच सितारा होटल और कूकस क्षेत्र की लग्जरी प्रॉपर्टी पर भी आयकर अधिकारियों ने दस्तावेज खंगाले।
रेड के बीच भी जारी रही ‘सेल’
छापेमारी के दौरान एक दिलचस्प दृश्य सामने आया। जहां पीछे के दफ्तरों में आयकर अधिकारी कंप्यूटर हार्ड डिस्क, डिजिटल रिकॉर्ड और कच्चे पर्चों की जांच कर रहे थे, वहीं रेस्टोरेंट के काउंटर पर ग्राहकों को कचौरी, समोसे और मिठाइयां परोसी जाती रहीं। विभाग ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि आम जनता को असुविधा न हो।
फ्रैंचाइजी और एफएमसीजी कारोबार भी जांच के दायरे में
कान्हा ग्रुप ने 2008 में अपना कारोबार शुरू किया था और कुछ ही वर्षों में राजस्थान सहित देश के कई हिस्सों में अपनी पहचान बना ली। पारंपरिक मिठाइयों, नमकीन और रेस्टोरेंट मॉडल के अलावा ग्रुप एफएमसीजी उत्पादों की बिक्री में भी सक्रिय है। फ्रैंचाइजी मॉडल से जुड़े संचालकों के दस्तावेज भी जांच के दायरे में हैं।
पूरी गोपनीयता से चला ऑपरेशन
बारिश और खराब मौसम के बावजूद आयकर विभाग की सैकड़ों सदस्यीय टीम ने इस ऑपरेशन को पूरी गोपनीयता के साथ अंजाम दिया। अचानक हुई इस कार्रवाई से संचालकों को संभलने का मौका नहीं मिला। बताया जा रहा है कि ग्रुप लंबे समय से विभाग की निगरानी में था और कई दिनों की रेकी के बाद यह बड़ी कार्रवाई की गई।
फिलहाल जब्त दस्तावेजों, बैंक खातों और डिजिटल डाटा की विस्तृत जांच जारी है। आने वाले दिनों में इस मामले में बड़े वित्तीय खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

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