जालौन की नून नदी बनी राष्ट्रीय उदाहरण — ज़रूर पढ़ें यह प्रेरणादायक खबर साथ ही डीएम राजेश पांडेय को राष्ट्रपति ने किया सम्मानित
रिपोर्ट — विनय पचौरी, संवाददाता
जालौन।यह खबर हर उस व्यक्ति के लिए है जो प्रकृति से प्रेम करता है, जो यह मानता है कि बिना प्रकृति के समन्वय के मानव जीवन अधूरा है। मजबूत इच्छा शक्ति और कार्य करने का जज़्बा हो तो असंभव भी संभव बन जाता है—इसका सबसे सुंदर उदाहरण है जालौन की नून नदी, जो कुछ वर्ष पहले अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही थी, लेकिन आज फिर जीवनदायिनी बनकर बह रही है।
कहानी नून नदी की—जो कभी विलुप्ति के कगार पर थी
कभी सूख चुकी नून नदी आज फिर से खेत-खलिहानों को हरा-भरा करने के लिए बह रही है। यह नदी जालौन जिले के पुरी की कुकर गांव से निकलती है और महेवा ब्लॉक के मंगराया तक अपना सफर तय करती है। लगभग 89 किलोमीटर की इस नदी से लगभग 48 गांव सीधे जुड़े हुए हैं।
अवैध अतिक्रमण, गाद जमाव और जलधारा टूटने के कारण यह नदी वर्षों से लुप्त होती जा रही थी। लेकिन अब तस्वीर बदल चुकी है—और इसका श्रेय जाता है प्रशासनिक इच्छाशक्ति और जनता की भागीदारी को।
राष्ट्रीय सम्मान — डीएम राजेश पांडेय को राष्ट्रपति ने किया सम्मानित
प्रदेश के उभरते और प्रभावी प्रशासनिक अधिकारियों में गिने जाने वाले जिलाधिकारी राजेश पांडेय को नून नदी संरक्षण मॉडल के लिए राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिला है।
नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें नून नदी संरक्षण एवं पुनर्जीवन अभियान के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान किया।
यह सिर्फ सम्मान नहीं, बल्कि एक जिले की सामूहिक मेहनत और जनभागीदारी का राष्ट्रीय स्वीकार है।
दो वर्षों की कड़ी मेहनत—नदी को फिर से दिया जीवन
डीएम पांडेय ने पिछले दो वर्षों में नून नदी को पुनर्जीवित करने के लिए एक बड़ा और संगठित जनअभियान चलाया। इसमें प्रशासन, तकनीकी विशेषज्ञ और 48 गांवों के हजारों ग्रामीण जुड़े। अभियान के प्रमुख कार्य—
नदी किनारों पर बड़े पैमाने पर पौधरोपण
अवैध खनन पर पूरी तरह रोक
रिचार्ज एवं वर्षा जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण
वैज्ञानिक तरीकों से नदी की जलधारा को पुनर्जीवित करने का कार्य
नदी मार्ग से अतिक्रमण हटाकर प्राकृतिक प्रवाह बहाल
इन प्रयासों का प्रभाव साफ दिखाई दिया—सूखी पड़ी नदी में फिर से पानी बहने लगा, जिससे गांवों में पेयजल, सिंचाई, और जलस्तर में उल्लेखनीय सुधार हुआ।
प्रधानमंत्री मोदी ने भी ‘मन की बात’ में की नून नदी की चर्चा
जालौन की नून नदी के संरक्षण कार्य की राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती सराहना का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इसे अपने कार्यक्रम ‘मन की बात’ में उल्लेखित किया। इससे यह मॉडल देशभर में चर्चा का विषय बन गया।
“यह सम्मान जिले की जनता का है”—डीएम पांडेय
पुरस्कार ग्रहण करते हुए डीएम पांडेय ने कहा—
“नून नदी जनभागीदारी का ऐसा मॉडल है, जो दिखाता है कि जब प्रशासन और जनता साथ आ जाएँ तो असंभव भी संभव हो जाता है। यह सम्मान पूरे जिले की जनता का है।”
गांवों में खुशी का माहौल है। स्थानीय लोगों ने कहा कि पहली बार किसी अधिकारी ने नदी को बचाने के लिए इतनी गंभीरता और मिशन भावना से काम किया है।
राष्ट्रीय स्तर पर मॉडल के रूप में अपनाने की तैयारी
राष्ट्रपति सम्मान मिलने के बाद नून नदी संरक्षण मॉडल को देश के अन्य राज्यों में भी लागू करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। विशेषज्ञ इसे ग्रामीण भारत में जल पुनर्जीवन का एक सफल उदाहरण मान रहे हैं।






