टीना डाबी: दिल्ली से राजस्थान तक बढ़ी चर्चा — राष्ट्रपति से सम्मान, बाड़मेर को दिलाया राष्ट्रीय गौरव

रिपोर्ट — विनय पचौरी 

राजस्थान की चर्चित और तेज़तर्रार आईएएस अधिकारी टीना डाबी ने एक बार फिर अपने काम से प्रदेश का मान बढ़ा दिया है। नई दिल्ली के प्रतिष्ठित विज्ञान भवन में आयोजित राष्ट्रीय समारोह में उन्हें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हाथों सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार उन्हें पश्चिमी राजस्थान में जल संकट से जूझते क्षेत्रों में चलाए गए जनभागीदारी आधारित ‘कैच द रेन’ अभियान की अद्वितीय सफलता के लिए मिला।

पश्चिमी राजस्थान में पानी की लड़ाई, समाधान बना डाबी का मॉडल

बाड़मेर जैसे रेगिस्तानी जिले में पानी हमेशा से चिंता का विषय रहा है। ऐसे कठिन हालात में टीना डाबी ने प्रशासन को केवल सरकारी तंत्र तक सीमित नहीं रखा, बल्कि जनता को केंद्र में रखकर बड़ा अभियान खड़ा किया।
‘कैच द रेन’ के तहत ग्रामीणों को प्रेरित कर बड़ी संख्या में टांका निर्माण, वर्षा जल संचयन और पारंपरिक जल-संरक्षण तरीकों को पुनर्जीवित किया गया।

इससे बारिश का पानी अब बहकर नष्ट नहीं होता बल्कि महीनों तक ग्रामीणों के उपयोग में आ रहा है। कई गांवों में 3–4 महीने तक मीठा पानी उपलब्ध रहने लगा है — रेगिस्तान के लिए यह किसी वरदान से कम नहीं।

टीना डाबी ने कहा कि यह पुरस्कार सिर्फ प्रशासन का नहीं, बल्कि हर उस व्यक्ति का है जिसने पानी बचाने की इस मुहिम में हाथ बढ़ाया।

सफलता का सिलसिला—हर पोस्टिंग में अलग पहचान

टीना डाबी की प्रशासनिक शैली की खासियत यह है कि वे योजनाओं को जमीन पर उतारते समय संवेदनशीलता और नवाचार को साथ लेकर चलती हैं।
उनके कुछ उल्लेखनीय कार्य:

✔ ‘सक्षम’ परियोजना — जैसलमेर में दिव्यांग परिवारों के लिए उम्मीद

जैसलमेर के कार्यकाल में उन्होंने दिव्यांग जनों के लिए मेडिकल कैंप, प्रमाणपत्र वितरण और सरकारी योजनाओं तक आसान पहुँच सुनिश्चित करने की पहल की।
यह परियोजना दिव्यांगों को मुख्यधारा में शामिल करने की दिशा में बड़ी उपलब्धि मानी गई।

शिक्षा और महिला सशक्तिकरण पर विशेष ध्यान

टीना डाबी ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर शिक्षा सुविधाएँ, बालिकाओं के लिए सुरक्षित माहौल और महिलाओं की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए लगातार काम करती रही हैं।
महिला स्व-सहायता समूहों के माध्यम से रोजगार उपलब्ध कराने के उनके प्रयासों की व्यापक सराहना हुई है।

बाड़मेर को नई दिशा — जनभागीदारी बना सबसे बड़ा हथियार

‘कैच द रेन’ अभियान की सफलता सिर्फ पुरस्कार जीतने तक सीमित नहीं है। इसने यह साबित किया कि—

जब जनता और प्रशासन साथ आएं तो रेगिस्तान में भी विकास के रास्ते खुद तैयार हो जाते हैं।

जल संरक्षण मॉडल के आधार पर अब बाड़मेर के कई गांव वर्षा जल पर निर्भर रहने लगे हैं, जिससे गर्मी के मौसम में जल संकट काफी कम हुआ है।

राष्ट्रपति सम्मान के बाद बढ़ी उम्मीदें

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा मिला यह राष्ट्रीय सम्मान न केवल टीना डाबी के प्रयासों की सराहना है बल्कि राजस्थान के लिए भी गर्व का क्षण है।
बाड़मेर में उनकी कार्यशैली अब एक प्रशासनिक मॉडल के रूप में देखी जा रही है जिसे अन्य जिलों में भी लागू करने की तैयारी है।

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