नही चाहिये दिल दुखाना किसी का
भजन से पूज्य श्री राजन जी महाराज ने श्रोताओं को किया मंत्र मुग्ध।
जिला भिंड के लहर में चल रही श्री राम कथा में परम पूज्य श्री राजन जी महाराज ने लंका पति रावण के व्यक्तित्व पर चर्चा करते हुए कहा कि हमें अभिमान का त्याग करना चाहिए अभिमान विनाश का कारण बनता है वही शांत-गंभीर और सौम्य स्वाभाव वाले श्रीराम ने कभी अपना धैर्य नहीं खोया। उन्होंने कभी भौतिकता , कामुकता,ईर्ष्या को अपने ऊपर हावी होने नहीं दिया ।
बल्कि हर परिस्थति में दृढ़ता बनाए रखना ही उनके सरल स्वभाव मे विधमान है। आज के मुश्किल समय में मनुष्य को सचेत किया व सीखना को कहा नियम संयम ये बडे शस्त्र हैं जो आपके जीवन को पार लगा सकते हैं यहाँ तालेश्वर शिव मंदिर लहार अपने आप मे बहुत ही रमणीय स्थल है और चल रही श्रीरामकथा का श्रद्धालुओं को परम पूज्य श्री राजन जी महाराज द्वारा रसपान कराया जा रहा है ।
इस कार्यक्रम मे वही चर्चा का विषय बने हुए हैं लहार नगर की हस्तियों मे पूर्व विधायक मथुरा प्रसाद महंत , श्री रसाल सिंह , श्री गोबिन्द सिंह कांग्रेस विधायक लहार व साथ मे अम्बरीष शर्मा गुड्डू भैया। यह चारो के चार जनता मे किसी के लिये बहुत अच्छे तो किसी के लिये बहुत बुरे बने है । और तो और यहाँ की जनता अपने शब्दो से स्वम ही दर्शाती है।
कथा के साथ साथ कही न कही आपसी प्रति द्वंद्विता भी स्पष्ट छाप छोड़ रही है क्षेत्र में
महाराज ने कहा कि मुझे लगता है दुनिया में कहीं भी चले जाएं प्रभु श्रीराम की बात आते ही उनके नाम के साथ जो दूसरी बात लोगों के मन में तुरंत आती है, वह है रामराज्य। पर श्रीराम का यश ऐसा है कि आप दुनिया में कहीं भी चले जाएं लोग रामराज्य को लाने पर जोर दिये है सनातन धर्म के बारे में व भारत को विश्व गुरू कहलाने मे अपनी अहम भूमिका निभा रहे हैं
यदि हम प्रभु राम के जीवन से सीख लें। उनके तौर-तरीके, दर्शन को मान्यताओं को अपने जीवन में भी उतार ले। फिर क्या यही तो है राम-राज्य।
कर्म पथ पर राम ने खुद को एकाग्र रखा और संयमित रहे। पर यदि संकल्प मजबूत रहे और संकट काल में संयम बनाए रखें तो बड़े से बड़े तूफान का सामना कर सकते हैं।

आगे परम पूज्य श्री राजन जी महाराज ने शिव विवाह कथा पर विस्तृत चर्चा की और भजन के माध्यम से यह भजन गाया
” नहीं चाहिए दिल दुखाना किसी का” नहीं चाहिए दिल दुखाना किसी का।।
आएगा बुलावा तो जाना पड़ेगा ।
सर तुझको आखिर झुकना पड़ेगा ।वहां ना चलेगा बहाना किसी का।।
शोहरत तुम्हारी बह जाएगी ।
यह दौलत यहीं पर रह जाएगी।
नहीं साथ जाना खजाना किसी का।। नहीं चाहिए दिल दुखाना किसी का।
इस भजन पर श्रोता गण मंत्र मुग्ध हो गए।
फिर क्या उन्होंने भजनों की लंबी कतार लगा दी महाराज जी ने ।
शंकर तेरी जटा में बहती है गंगधार ।
वही माता सती के स्वरूप का वर्णन विस्तृत रूप से किया।






